Tuesday, 29 December 2020

आधुनिक मत्स्य पालन। मत्स्य पालक विकास अभिकरण (आत्मा योजना)

            
क्यों
अत्याधिक पौष्टिक आहार एवं तथा शीघ्र पाचक हेतु।
 देश की बढ़ती जनसंख्या के लिए पौष्टिक खाद्य पदार्थ एवं कुपोषण की समस्या के समाधान हेतु। 
 देश को पौष्टिक प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ उत्पादन में स्वावलंबी बनाने हेतु। 
 खाद्य सामग्री के उत्पादन में भाग लेने वाले पोखराो एवं तालाबों से पौष्टिक खाद्य सामग्री मछली के रूप में। 
 उत्पादन करने एवं उनकी उत्पादन क्षमता का पूर्ण रूप से उपयोग करने हेतु। 
कहाँ 
 प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में तालाब,उपलब्ध है, निम्नलिखित प्रकार के तालाबों में मत्स्य पालन किया जा सकता है-
 साल भर 1.5 मीटर से 2 मीटर गहरा पानी हर मौसम में उपलब्ध रहे बाढ़ का प्रभाव ना पड़ता हो। 
 नालें अथवा नदी से सीधे ना मिलते हो। 
 किसी भी प्रकार की जलीय घास ना हो। 
फैक्ट्री का गंदा पानी ना आता हो। 
कैसे 
तालाबों में मत्स्य पालन निम्न बातों को ध्यान में रखकर आरंभ करें-
तालाब की गहराई इतनी रखें कि उसमें 1.5 मीटर से 2 मीटर तक पानी साल भर भरा रह सके
तालाब में सभी बंधओं को ठीक करा दें, जिससे वर्षा का प्रभाव ना पड़े बांध क्षतिग्रस्त ना हो और मछलियां तालाब से बाहर ना जा सके
पानी के आने के रास्तों पर लोहे की जाली लगाएं जिससे कि अधिक पानी ना आ सके तथा अनावश्यक पानी बाहर निकाला जा सके तथा  बांध टूटने से बच सकें एवं मछलियां जाली से ना तो बाहर जा सके और बाहर की मछलियां अंदर न आ सके
तालाब की जलीय घास को निकाल दिया जाए 
तालाब में पानी वाली मछलियों को हानि पहुंचाने वाले कीड़ों एवं मछलियों को निकलवा दें इस कार्य हेतु महुआ की खली 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में बुलवा कर तालाब में छिड़काव करें। महुआ की खली के प्रयोग से मरी मछलियों को खाने के प्रयोग में लिया जा सकता है। 
तालाब में चूने का प्रयोग 2 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से करें। तालाब में गोबर की खाद 10 टन से 20 टन 10 किस्तों में डाले यह कार्य चुना डालने के 20 दिन बाद करें। 
गोबर की खाद डालने के 15 दिन के बाद अकार्बनिक खाद का मिश्रण (अमोनियम सुपर फास्फेट म्यूरेट आफ पोटाश) 740 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 10 किस्तों में डालें तालाब के पानी का निरीक्षण करते रहे जब तालाब उपरोक्त खादों के प्रयोग से तालाब में 15 से 21 दिनों के भीतर ताला में मछलियों का भोजन पैदा होना आरंभ हो जाएगा इसके बाद 10000 अंगुलिका  प्रति हेक्टेयर की दर से संचय करें। 
अंगुलिका  संचय उपरांत अंगुलिका को 1 माह से 3 माह तक पूरक आहार देना चाहिए जिससे कि अंगुलिका  शीघ्र बढ़ सके मूंगफली की खली अथवा सरसों की खली एवं कना बराबर भाग में मिलाकर 1 से 3% मछली के भार के अनुसार देना उचित होगा।
अंगुलिकाओ पूरक भोजन प्रतिदिन निश्चित स्थान एवं निश्चित समय पर दिया जाए। 
प्रत्येक माह तालाब में जाल चलवा कर मछलियों की बाढ़ व स्वास्थ्य का परीक्षण करते रहे। 
बीमारियों से बचाव 
विगत वर्षों में तालाबों में अल्सरेटिव सिंड्रोम नामक बीमारी प्रकाश में आई है जिसके फलस्वरूप मछलियों में असमान्य व्यवहार शरीर पर लाल चकत्ते का पडना घाव हो जाना पूछ सड़ना वह गिर जाना आदि प्रमुख लक्षण है-
रोग ग्रस्त मछलियों को निकाल कर जमीन में गाड़ दें एक तालाब में चलाया गया जाल पहले साफ करके सुखा लिया जाए तभी उसे दूसरे तालाब में चलाया जाए 
तालाब में 375 से 625 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुझे हुए चूने का छिड़काव तीन 3 सप्ताह के अंतराल पर 4 बार कराया जाए 
पानी अधिक प्रदूषित होने पर 1250 से 1875 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से परामर्श पर नमक डाला जाए 
0.50 पीपीएम पोटेशियम परमैंगनेट का प्रयोग लाभकारी है इस तालाब में रोग नहीं है उसमें भी सावधानी स्वरूप ढाई सौ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुझे चूने का प्रयोग किया जाए। 
एक्वा हेल्थ दवा का प्रयोग 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से लाभकारी है। 
 आदर्श तालाब
तालाब के चारों ओर के बंधे मजबूत एवं बंधे का ऊपरी भाग 2 मीटर चौड़ा तथा डाल एक अनुपात 2:00 के अनुपात में हो 
तालाब में जलीय घास आदि ना हो तालाब में पानी के आने व जाने के रास्ते में लोहे की जाली लगी हो
 तालाब का पल हर स्थान पर समतल हो जिससे कि जाल के प्रयोग में कठिनाई ना हो 
तालाब में हर ऋतु में 1.5 से 2 मीटर तक पानी भरा रहे एवं पानी भरने का साधन हो 
तालाब में  अवांछनीय मछलियां ना हो 
चूने का प्रयोग निर्धारित मात्रा एवं समय से किया गया हो। 
खाद, उर्वरक व पूरक भोजन का प्रयोग निर्धारित समय व मात्रा में किया गया हो निर्धारित मात्रा अर्थात 5000 से 10000 अंगुलिका प्रति हेक्टेयर का संचय किया गया हो। 
 आवश्यकता है
कि देश की बढ़ती खाद्य समस्या के समाधान में आप भी भाग ले तथा अपने क्षेत्र के समस्त जल क्षेत्र का उपयोग करें एवं मछलियों के रूप में पौष्टिक खाद्य का उत्पादन करें। अपने आर्थिक दशा में सुधार लाएं।
कब क्या करें
 10000 किलोग्राम गोबर खाद व 740 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रसायनिक खाद किस्तों में प्रयोग करें। 
मई (प्रथम सप्ताह) तालाब के बन्धो की मरम्मत कार्य पूर्ण करने के उपरांत अनावश्यक मछलियों एवं जलीय पौधों की सफाई। 
मई (द्वितीय सप्ताह) चूने का प्रयोग 2 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से करें।
जून (प्रथम सप्ताह) खादी करण गोबर की खाद से।
जून ( तृतीय सप्ताह)  उर्वरक का प्रयोग (अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश) 
 जुलाई (प्रथम सप्ताह) कीड़े मकोड़ों की सफाई तथा प्लॉक्टॉन के उत्पादन का निरीक्षण अंगुलीका संचय।
अगस्त (आरंभ में) पूरक आहार एवं गोबर की खाद का प्रयोग।
अगस्त (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग। 
सितंबर( आरंभ में) पूरक आहार का प्रयोग। 
सितंबर( द्वितीय सप्ताह) गोबर की खाद से खादी करण एवं अंगुलिका के स्वास्थ्य का निरीक्षण।
सितंबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग। 
अक्टूबर (प्रथम सप्ताह) गोबर की खाद का प्रयोग। 
अक्टूबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग। 
नवंबर (प्रथम सप्ताह) गोबर की खाद का प्रयोग
नवंबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग
नवंबर (चतुर्थ सप्ताह) अंगुलिकाओ के स्वास्थ्य एवं प्लैकटाॅन का निरीक्षण
 दिसंबर पूर्व वर्ष की पाली मछलियों की शिकार माही, खादीकरण गोबर व उर्वरक का प्रयोग। 
जनवरी पूर्व वर्ष के पाली मछलियों की शिकार माही।खादीकरण (गोबर व उर्वरक) 
फरवरी खादीकरण (गोबर व उर्वरक) 
अप्रैल खादीकरण (गोबर व उर्वरक) 
मत्स्य पालक विकास अभिकरण का उद्देश्य
ग्राम सभा के तालाबों का सर्वेक्षण एवं सुधार योग्य उपयुक्त तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर दिलाना। 
तालाबों के सुधार हेतु आगणन एवं परियोजना तैयार कर सुधार एवं इनपुट्स हेतु बैंक से ऋण दिलाना एवं स्वीकृति पर अनुदान देना। 
चयनित व्यक्ति को आधुनिक मत्स्य पालन विधि में प्रशिक्षित किया जाना। 
मत्स्य पालकों को आवश्यकता अनुसार मत्स्य बीजों की पूर्ति कराना। 

Friday, 25 December 2020

निषाद मछुआ किसानों की समस्याओं को लेकर अमेठी सांसद/केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को प्रार्थना पत्र सौंपा

 

सिंहपुर, अमेठी। निषाद मछुआ किसानों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय निषाद संघ के जिला अध्यक्ष की अगुवाई में पदाधिकारियों द्वारा अमेठी सांसद/केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी प्रार्थना सौंपा गया है शुक्रवार को सिंहपुर राम लीला मैदान किसान गोष्ठी कार्यक्रम में नेशनल एसोसिएशन आफ फिशरमैन जिला अध्यक्ष के द्वारा सौंपे गए प्रार्थना पत्र मे लिखाा हैकि  शाशनादेश के क्रम में मत्स्य पालकों व मछुआ किसानों का बैंक द्वारा क्रेडिट कार्ड बनाए जाने का निर्देश हुआ था। परंतु आज तक जनपद में किसी भी मछुआ समुदाय/मत्स्य पालक व मछुआ किसानों का केवल  1% किसान क्रेडिट कार्ड बनाया गया है। मछुआ किसान बैंक जाता है तो बैंक अधिकारी कर्मचारी तीन से चार महीने दौड़ा दौड़ा कर परेशान कर रहे हैं। कमीशन बिना नहीं करते मछुवा किसानों की फाइल, फाईल बैंक से वापस मत्स्य विभाग भेज देते हैं । 
उन्होंने लिखा है कि राजस्व विभाग श्रेणी6 की भूमि जो राजस्व खतौनी में जलमग्न,नदी नाला, झील झाबर दर्ज,कृषि योग्य भूमि पर आसामी पट्टे की भाँति मछुआ समुदाय के व्यक्तियों को प्रत्येक ग्राम पंचायत में कृषि हेतु पट्टे आवंटित किए जाएं। जिन तालाबों में बंधा निर्माण नहीं है पूरे वर्ष पानी नहीं रुकता है या मछली पालने योग्य नहीं है। उन तालाबों को शासनादेश 6 जुलाई 1987 के तहत सिंघाड़ा उत्पादन/कृषि कार्य पर रोक न लगाई जाए। और प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 50 मछुआ आवास का निर्माण करवाने की मांग की, विगत वर्षों से नहीं आया मछुआ आवास अमेठी।इस मौके पर  जिला अध्यक्ष के साथ, दीपक कश्यप, सूरज कश्यप, सहदेव , रामगुलाम कश्यप,विजय,सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। 

Wednesday, 23 December 2020

मण्डल विरोधी भाजपा नहीं हो सकती कभी पिछड़ों की हितैशी -लौटन निषाद

देश में जरूरत है वन नेशन वन एजुकेशन की, निजी शिक्षण संस्थानों में एससी/एसटी का आरक्षण खत्म करना आरएसएस की सोच


लखनऊ।राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव लौटन  निषाद ने कहा कि भाजपा संघ के इशारे पर पिछड़ों दलितों, आदिवासियों को शिक्षा से वंचित करने व सामाजिक अन्याय का शिकार बनाने के काम में जुटी हुयी है। प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के एक महीना के अन्दर ही योगी ने निजी मेडिकल, डेन्टल व इंजीनियरिंग कालेजों में मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा ओबीसी को 27 प्रतिशत व एससी/एसटी को 22.5 प्रतिशत आरक्षण की की गयी व्यवस्था को खत्म कर दिया। यही नहीं मुलायम सिंह यादव जी व अखिलेश यादव जी द्वारा सभी वर्ग व समुदाय के विद्यार्थियों की आगे की शिक्षा के लिए छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था किये थे। योगी सरकार ने पिछड़े दलित वर्ग के विद्यार्थियों की छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था को निष्प्रभावी कर दिया। उन्होंने कहा कि संघ के इशारे पर लोक सेवा आयोग व उच्च न्याय पालिका पिछड़ा-दलित वर्ग का आरक्षण खत्म करने के काम में जुटा हुआ है। भाजपा पिछड़े वर्ग को सामाजिक अन्याय, उत्पीड़न व अत्याचार का शिकार बनाने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ी हुयी है।
       निषाद ने कहा कि मण्डल विरोधी भाजपा कभी पिछड़ों की हितैशी नहीं हो सकती। भाजपा फूट डालों और शासन करो की नीति पर चलते हुए पिछड़ा-अतिपिछड़ा व दलित-अतिदलित के बीच नफरत की भावना पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाया। अखिलेश यादव की सपा सरकार को एक जाति विशेष की सरकार होने का दुष्प्रचार कर अतिपिछड़ों को गुमराह करने व सपा विरोधी बनाने का काम किया। अतिपिछड़ों ने सामाजिक न्याय व संरक्षा की लड़ाई आगे होकर लड़ने वाले यादव समाज को अपना विरोधी मानकर सपा के विरूद्ध हो गया। योगी सरकार की पिछड़ा -दलित विरोधी नीतियों से धर्म की घुट्टी पीकर भाजपा के झॉसे में आने वाले पिछड़े दलित पछता रहे हैं।
      निषाद ने कहा कि आरएसएस का जन्म सामाजिक न्याय के ही विरोध में हुआ। जब ब्रिटिश हुकुमत ने भारत सरकार अधिनियम-1919 के माध्यम से पूरे देश में हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अन्तर्गत शूद्र कहीं जाने वाली जातियों को शिक्षा व नौकरियों में प्रतिनिधित्व हेतु डिप्रेस्ड क्लास के नाम पर आरक्षण दिया तो मनुसंविधान समर्थक जातियों ने पहले हिन्दू महासभा और बाद में 1925 में आरएसएस का गठन किया।आरएसएस कांग्रेस की सन्तति है और भाजपा आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी है। भाजपा संघ के रिमोट कन्ट्रोल से संचालित होती है। आरएसएस ने मण्डल कमीशन की रिपोर्ट न लागू करने की शर्त पर 1980 में इन्दिरा गांधी व 1985 में राजीव गांधी को समर्थन दिया। जनता दल की सरकार ने 7 अगस्त,1990 को जब सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था का निर्णय लिया तो भाजपा ने कमण्डल लेकर सोमनाथ से अयोध्या में मंदिर बनाने का मुद्दा उछाल राम रथ यात्रा पर सवार हो गयी।भाजपा पिछड़ों दलितों के साथ यूज एण्ड थ्रो की पॉलिसी अपनाती है। भाजपा में जो ओबीसी,एससी नेता हैं वे अपने जाति व जमात के साथ हर स्तर पर हो रहे सामाजिक अन्याय व अत्याचार पर चुप्पी साधे गंगू बहरे बने बठे हैं और उनका जमीर मर चुका है।उन्होंने वन नेशन वन एजुकेशन की मांग करते हुए कहा कि दोहरी शिक्षा नीति भेदभावपूर्ण है। - Lautan Nishad

Monday, 21 December 2020

भाजपा सरकार पिछड़ों-दलितों को सामाजिक न्याय से वंचित करने में जुटी -लौटन राम निषाद

ओबीसी की जातिगत जनगणना करने व कोलेजियम सिस्टम खत्म करने की मांग

लखनऊ।राष्ट्रीय निषाद संघ(एन ए एफ) के राष्ट्रीय सचिव चौ० लौटन राम निषाद ने केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार पर पिछड़ों-दलितों को सामाजिक न्याय से वंचित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब से केन्द्र व उप्र में भाजपा की सरकार बनी है, पिछड़े -दलित वर्ग के आरक्षण पर कुठाराघात किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने को पिछड़ी जाति का बताते हैं।यदि वे पिछड़ी जाति के हैं तो ओबीसी की जातिगत जनगणना उजागर कर ओबीसी को सभी स्तरों पर जनसंख्यानुपाती आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सवर्ण जातियों को 72 घण्टे के अन्दर संविधान व उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परे जाते हुए जब 10 प्रतिशत आरक्षण दे दिया तो मण्डल कमीशन के तहत 52 प्रतिशत आरक्षण देने का कदम उठाना चाहिये। उ.प्र. सरकार की सामाजिक न्याय समिति-2001 के अनुसार अन्य पिछड़े वर्ग की संख्या 54 प्रतिशत स्वीकार की गयी है तो ओबीसी को 27 प्रतिशत ही आरक्षण क्यों? उन्होंने कहा कि एससी/एसटी की भांति ओबीसी को जनसंख्यानुपाती आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन कराया जाय।
         निषाद ने कहा कि केन्द्र सरकार सेन्सस-2011 के अनुसार एससी, एसटी, धार्मिक अल्पसंख्यक (जैन, बौद्ध, पारसी, मुस्लिम, सिख, इसाई, रेसलर आदि) के साथ-साथ ट्रान्सजेन्डर व दिव्यांग की जनगणना उजागर कर दी गयीं। लेकिन ओबीसी की जनगणना को घोषित नहीं किया गया। उन्होंने कार्यपालिका के साथ-साथ विधायिका, न्याय पालिका, पदोन्नति एवं निजी क्षेत्र के उपक्रमों, संस्थानों व केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी को आरक्षण देने तथा ओबीसी आरक्षण को 9 वीं अनुसूचि में दर्ज करने की मांग किया है। उन्होंने केन्द्र सरकार से सेन्सस -2021 में  जातिगत जनगणना कराने, कोलेजियम सिस्टम खत्म कर उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों का चयन संघ लोक सेवा आयोग व लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा के पैटर्न पर राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग के माध्यम से कराने की मांग किया है।
          निषाद ने कहा कि केन्द्र सरकार सरकारी उपक्रमों, संस्थानों का निजीकरण कर व प्रदेश सरकार संविदा, आउट सोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियाँ कर ओबीसी, एससी, एसटी के आरक्षण को कुंद व निष्प्रभावी कर रही है। उन्होंने कहा कि जूनियर व सीनियर ज्यूडिसियरी में ओबीसी, एससी व एसटी को आरक्षण की व्यवस्था है,परन्तु उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की व्यवस्था न होने से वंचित वर्ग संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं । उन्होंने उच्च न्यायपालिका में कोलेजियम सिस्टम से न्यायाधीशों का मनोंयन न कर संघ लोक सेवा आयोग व लोक सेवा आयोग के पैटर्न पर राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग के द्वारा  त्रिस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से न्यायाधीशों का चयन किये जाने की मांग उठाया है।
-Form Facebook 

Wednesday, 25 November 2020

विधानसभा चुनाव -2022 में अत्यन्त पिछड़ी जातियां निभाएंगी की भूमिका -लौटन निषाद

भाजपा ने अति पिछड़ी जातियो को सिर्फ वोट बैंक समझ किया अधिकारों से वंचित

लखनऊ, 25 नवम्बर । राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौधरी लौटन निषाद ने भाजपा पर अति पिछड़ी जातियों को अधिकार वंचित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिन्दुत्व के नाम पर भाजपा सिर्फ ईबीसी व एमबीसी की जातियों को वेाट बैंक समझती है। मंडल विरोधी भाजपा कभी पिछड़ों,अति पिछड़ों की  हितैषी नहीं हो सकती । चुनाव के समय पिछड़ों दलितों  व आदिवासियों को हिन्दू कहकर इनकी वोट की बदौलत सत्ता हथियाने के बाद इनके साथ दोयम दर्जे का ही बर्ताव करती है। विधानसभा चुनाव-2022 में 33 प्रतिशत से अधिक संख्या वाली अत्यन्त पिछड़ी जातियां निर्णायक की भूमिका निभायेंगी। किसी भी राजनैतिक दल ने इस वर्ग के साथ सामाजिक-राजनीतिक न्याय नहीं किया। 
        निषाद ने उत्तर प्रदेश के जातिगत समीकरण पर  प्रकाश डालते हुये बताया कि हिन्दू, मुस्लिम सामान्य वर्ग की जातियां- 20-94 प्रतिशत, यादव-10-48 प्रतिशत, निषाद/कश्यप - 10-46 प्रतिशत, जाटव- 11-86 प्रतिशत, कुशवाहा/मौर्य/सैनी-4-85 प्रतिशत, कुर्मी- 4.10 प्रतिशत, लोधी/किसान-3-60 प्रतिशत, पासी-3-87 प्रतिशत, पाल/बघेल-2-38 प्रतिशत, जाट-1-94 प्रतिशत, प्रजापति - 1-84 प्रतिशत, बढ़ई/लोहार- 1.72 प्रतिशत, तेली/साहू-1.61 प्रतिशत, राजभर-1.31 प्रतिशत, चौहान-1.26 प्रतिशत, कोरी- 1.11 प्रतिशत, नाई-1.06 प्रतिशत, कांदुु/भुर्जी -1.01 प्रतिशत, गुर्जर-0.72 प्रतिशत हैं।आगामी विधानसभा चुनाव में अति पिछड़ी,अत्यंत पिछड़ी व अति दलित जातियों की खासी भूमिका रहेगी। प्रजाजाति के रूप में ख्यात लोहार, बढ़ई, कुम्हार, बरई, बारी, नाई, हज्जाम,धोबी आदि  जिन्हें राजनीतिक रूप से महत्व नहीं दिया जाता, कम संख्या होने के बाद भी पंचफोरन वाली प्रजाजातियों की संख्या हर विधानसभा में 40 से 70 हजार तक होती है। जो फ्लोटिंग वोटर के रूप में चुनाव की दिशा-दशा बदल देती हैं। 
        निषाद ने कहा कि अब अति पिछड़ी व अत्यन्त पिछड़ी जातियों के अंदर भी राजनीतिक इच्छाशक्ति, भूख, व सम्मान की भावना जागृत हुई है। इन जातियों की उपेक्षा करने वाला कोई भी राजनैतिक दल सत्ता का हकदार नहीं बन सकता। अब ईबीसी व ,एमबीसी की जातियों में भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा व प्रतिनिधित्व की भावना पैदा हुई है। "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी" को केवल भाषण का रूप ही नहीं मूर्त रूप देना पड़ेगा। इन वर्गों की जो उपेक्षा करेगा, वह खुद राजनीतिक रूप से पीछ़े चला जायेगा। सोशल इंजीनियरिंग व माइक्रो सोशल इंजीनियरिंग के आधार पर संगठन में सम्मान व टिकट वितरण में हिस्सेदारी की आकांक्षा अत्यन्त पिछड़ों में तेजी से बढ़ी है। इस वर्ग की जातियां सत्ता का खेल बनाने व बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। 

Tuesday, 24 November 2020

मत्स्य पालन में अनियमितता को लेकर निषाद संघ के कार्यकर्ता बैठे धरने पर

 गौरीगंज, अमेठी। निषाद मछुआरों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय निषाद संघ के जिला अध्यक्ष की अगुवाई में पदाधिकारियों द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है और करोना महामारी में मछुआरों का लगान माफ किए जाने की सिफारिश की गई है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में नेशनल एसोसिएशन आफ फिशरमैन जिला अध्यक्ष की अगुवाई में दर्जनों लोग धरने पर बैठ गए। धरने के बाद संघ के लोगों ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में लिखा है कि तहसील तिलोई क्षेत्र के विकासखंड सिंहपुर की ग्राम पंचायत खानापुर चपरा निवासी सीताराम पुत्र धौकल ने 7 दिसंबर 2016 को मत्स्य पालन पट्टा शिविर में आवेदन किया था और लगान की दस फीसदी रकम जमा की और पट्टा निरस्त कर दिया गया। तहसील प्रशासन द्वारा उसी तालाब पर पुनः प्रकाशन कर अनुसूचित जाति के पट्टा आवंटित किया जा रहा था। जिसकी शिकायत उप जिलाधिकारी से की गई तो निरस्त कर दिया गया। 2020में मत्स्य पालन के लिए गजट हुआ तो सीताराम ने फिर आवेदन किया जिसे हल्का लेखपाल ने गलत रिपोर्ट लगाकर निरस्त कर दिया गया है। जिला अध्यक्ष ने लिखा कि 27 एवं 28 अक्टूबर  मत्स्य पालन पट्टा शिविर में 44 मछुआ समुदाय एवं 65 अनुसूचित जाति का आवेदन हुआ वह 1 वर्ष की लगान जमा किया गया, जिसमें अभी तक 7 पट्टा स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने लिखा है कि मत्स्य विभाग द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड हेतु लक्ष्य के अनुरूप 181 पत्रावली विभिन्न बैंकों को प्रेषित की गई थी जिसमें 40 पत्रावली विभिन्न बैंकों द्वारा स्वीकृति की गई जबकि 35 पत्रावली को बैंक द्वारा कोई न कोई कमी लगाकर वापस कर दिया गया और लगभग 100 पत्रावली  लंबित है। इस मौके पर  जिला अध्यक्ष के साथ  दयाशंकर, दीपक कश्यप, सूरज कश्यप, विनोद कश्यप, तेज बहादुर कश्यप, जनक बहादुर, सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। 

Monday, 9 November 2020

उ.प्र. विधान परिषद खण्ड स्नातक व शिक्षक क्षेत्र के सपा समर्थित उम्मीदवारों के समर्थन की अपील शिक्षक व स्नातक खण्ड निर्वाचन विधानसभा चुनाव-2022 के लिए स्क्रीन टेस्ट -चौ. लौटन निषाद

लखनऊ । उ.प्र. विधान परिषद खण्ड स्नातक निर्वाचन एवं खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के सपा समर्थित उम्मीदवारों के समर्थन में समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ. लौटन निषाद ने समर्थन की अपील किया है। उन्होंने इसे विधानसभा चुनाव-2022 का स्क्रीन टेस्ट बताया। उन्होंने बताया कि वाराणसी खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लाल बिहारी यादव, गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक क्षेत्र से डा. अवधेश यादव, लखनऊ खण्ड शिक्षक क्षेत्र से उमाशंकर पटेल, वाराणसी खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से आशुतोष सिन्हा, इलाहाबाद -झाँसी, खण्ड स्नातक क्षेत्र से डा0 मानसिंह यादव, एवं लखनऊ खण्ड स्नातक क्षेत्र से रामसिंह राणा समाजवादी पार्टी के समर्थित उम्मीदवार हैं। उन्होंने शिक्षक खण्ड निर्वाचन क्षेत्र व खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र केे मतदाताओं से सपा समर्थित उम्मीदवारांे को प्रथम वरीयता का मत देकर जिताने का आहवान किया है। 
     निषाद ने कहा कि खण्ड स्नातक व खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा समर्थित उम्मीदवारों की सफलता विधानसभा चुनाव-2022 का रोड मैप तैयार करेगा। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से शिक्षक व स्नातक विधान परिषद खण्ड निर्वाचन को गम्भीरता से लेने का आहवान किया है। निषाद ने कहा कि सभी पदाधिकारियांे व कार्यकर्ताओं को खण्ड शिक्षक व स्नातक निर्वाचन को निष्ठा लगन व ईमानदारी से लेेते हुए तन्मयता से जीतने की अपील की है। पार्टी कार्यकर्ता व पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण चुनाव को हल्के में न लंे पूरी गम्भीरता से लें और आज ही से सभी पदाधिकारी व वरिष्ठ नेता खुद को उम्मीदवार मानकर लोगों के बीच जाना  शुरू करेें।
      निषाद ने कहा कि वर्तमान सरकार छात्र-नौजवान, किसान , मजदूर, व्यापारी व श्रमिक वर्ग की विरोधी है। भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों सम्बन्धी बिल को उच्च सदन में रोकने हेतु समाजवादी पार्टी का विधान परिषद में बहुमत जरूरी है। ताकि सरकार की मनमानियों पर अंकुश लगाने की ताकत बनी रहे। 

Thursday, 5 November 2020

फिशरमेन वीजन डाक्यूमेन्ट्स के संकल्प को पूरा न कर भाजपा ने किया वायदा खिलाफी’’उप चुनाव में भाजपा ने प्रशासनिक तौर पर कराया धांधली-निषाद


 लखनऊ 05 नवम्बर, 2020। 5 अक्टूबर, 2013 को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी व स्व0 सुषमा स्वराज ने मावलंकर सभागार में मछुआरा दृष्टि पत्र/फिशर मेन विजन डाक्यूमेन्ट्स जारी करते हुए संकल्प लिया था कि सरकार बनने पर निषाद मछुआरा समाज की जातियों को अनुसूचित जाति/जनजाति का दर्जा देकर क्षेत्रीय असमानता दूर की जायेगी। साथ ही निषाद मछुआरों के आर्थिक विकास के लिए नीली क्रान्ति को विकसित करने का संकल्प लिया था। समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष लौटन राम निषाद ने फिशरमेन विजन डाक्यूमेन्ट्स के संकल्प को पूरा न कर भाजपा पर वायदा खिलाफी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब योगी सांसद थे तो संसद में निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप, बिन्द आदि जातियों की गरीबी व बदहाली का हवाला देकर अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग उठाते थे। परन्तु मुख्यमंत्री बनते ही वे निषादों को भूल गये। भाजपा ने विधान सभा चुनाव 2012 के चुनाव घोषणा पत्र व भाजपा दृष्टि पत्र में संकल्प लिया था कि भविष्य में भाजपा की सरकार बनने पर निषाद, मछुआ, मल्लाह, केवट, मांझी, धीवर,धीमर, कहार, कश्यप, गोड़िया, तुरहा, बाथम, रायकवार, बिन्द, नोनिया, लोनिया, भर, राजभर, कुम्हार, प्रजापति, बियार, बंजारा आदि जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाया जायेगा। 
 निषाद ने कहा कि वर्तमान में राज्य व केन्द्र दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार होने के बाद भी अतिपिछड़ी जातियों से किया गया वायदा भाजपा ने पूरा न कर दगाबाजी व वायदा खिलाफी किया है। सपा सरकार ने 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के संबंध में केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। भाजपा ने अपना वायदा तो पूरा नहीं किया, उलटे सपा सरकार को भेजे गये प्रस्ताव को निरस्त व रद्द कर दिया। चुनाव के समय भाजपा श्रीराम-निषाद राज की मित्रता का हवाला देकर निषाद मछुआरा समाज का वोट लेती रही है। परन्तु सत्ता में आने के बाद निषादों की हर स्तर पर उपेक्षा व अधिकार हनन ही किया है। सपा सरकार में निषाद समाज का सम्मान बढ़ाने के लिए 5 अप्रैल को निषाद राज व कश्यप )षि की जयन्ती के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। जिसे योगी सरकार में खत्म कर दिया। 
 निषाद ने कहा कि भाजपा छल कपट, झूठ फरेब व जुमलेबाजी की राजनीति करती है। पिछड़ा दलित वंचित वर्ग अब भाजपा के चाल चरित्र को समझ गया है। बी0जे0पी0 का नाम भारतीय झूठ फरेब पार्टी या भ्रष्ट जुमलेबाज पार्टी उचित है। योगी ने 7 विधान सभा उप चुनाव में अधिकारियों व प्रशासन की मद्द से चुनाव जीतने का हर सम्भव प्रयास किया है। परन्तु जनता इनकी आशाओं पर पानी फेरेगी। अधिकारियों ने योगी के निर्देश पर यादव व मुस्लिम मतदाताओं का वोटर लिस्ट से हर गांव में 100 से 200 नाम कटवाने का काम किया है। इसके बावजूद भी भाजपा को मुह की खानी पड़ेगी। भाजपा ने अतिपिछड़ों व अति दलितों के साथ नाइंसाफी किया है। अब भाजपा की उलटी गिनती शुरू हो गयी है। भाजपा व आर0एस0 ने यादव-गैर यादव, जाटव-गैर जाटव व हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत की राजनीति करने के बाद अब दहशत की राजनीति शुरू कर दिया है। पूरे प्रदेश में एक जाति विशेष का हर स्तर पर वर्चस्व , अत्याचार व गुण्डागर्दी चल रही है। कानून व्यवस्था ध्वस्त है। पूरे प्रदेश में गुण्डाराज, जंगलराज कायम हो गया है। जनता अब भाजपा के कारनामों से अपने को ठगा महसूस कर रही है। 

 - चौ0 लौटन राम निषाद

Tuesday, 20 October 2020

जो जातिवादी वो समाजवादी नहीं हो सकता-लौटन निषाद

जो जातिवादी वो समाजवादी नहीं हो सकता-लौटन निषाद
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सवर्ण जाति देखकर वोट करता है,पार्टी के नाम पर बहुत ही कम
      सवर्ण समाज की ब्राह्मण,भूमिहार,राजपूत आदि जातियाँ पार्टियों के आधार पर देखा जाय तो कांग्रेस या भाजपा की ही वफादार होती हैं,सपा,बसपा,राजद.....की नहीं।या यों कहें कि सवर्ण समाज पार्टी का नहीं जाति का वफादार होता है।वह राजनीतिक स्वार्थ के लिए सपा,बसपा,राजद में रहता है,पर उसकी निष्ठा भाजपा,कांग्रेस जैसी सवर्ण वर्चस्व वाली पार्टियों के प्रति ही होती है।
      एक बार विधानसभा चुनाव-2007 में हमने एक अध्ययन किया।एक ही टीम दिलदारनगर में सपा के ओमप्रकाश सिंह, धानापुर में बसपा के सुशील सिंह,जमानियां में भाजपा के अरुण कुमार सिंह, ग़ाज़ीपुर सदर में कांग्रेस के डॉ. मार्कण्डेय सिंह व जहूराबाद में कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह के लिए प्रचार करते पाए गए।इसी तरह भूमिहारों की एक टीम जो कहने को सपाई थे लेकिन दिलदारनगर में बसपा के पशुपतिनाथ राय,मोहम्मदाबाद में भाजपा की अलका राय,पिंडरा में कांग्रेस के अजय राय,ब्यालसी में बसपा जगदीश राय का प्रचार करते पाए गए।
क्या सवर्ण पिछड़ों-दलितों का हो सकता है हितैषी-
    जो सवर्ण विशेषकर ब्राह्मण,राजपूत व भूमिहार कभी भी पिछड़ों-दलितों का हित नहीं सोच सकता।जो सवर्ण हमारे पूर्वजों,बाप-दादा को जमीन पर बैठने नहीं दिया,अपने द्वार से जूता-चप्पल पहने व साइकिल पर चढ़कर गुजरने नहीं दिया,वह हमारे मान सम्मान व अधिकार का हितैषी नहीं हो सकता।ब्राह्मण जब गरीब होता है तो सुदामा और अमीर होने पर परशुराम बन जाता है।
    क्या मुसलमान पिछड़ों-दलितों का दुश्मन है?
       आदिवासियों-गिरिवासियों-वनवासियों को शिक्षा देने वाले ऋषि शम्बूक की गर्दन ब्राह्मणों ने साज़िश कर राम से कटवा दिया।स्व अभ्यास से धनुर्विद्या में पारंगत निषाद पुत्र एकलव्य का अँगूठा धोखे द्रोणाचार्य ने अर्जुन को महान धनुर्धर बनाने के लिए कटवा लिया।पिछड़ों-दलितों-आदिवासियों को शिक्षा से वंचित ब्राह्मणों ने किया था।मण्डल कमीशन के विरोध में सवर्णों ने 1990 में पूरे देश में तबाही मचा दिया।साइमन कमीशन का विरोध ब्राह्मणों व सवर्णों ने किया,तो हमारे पिछड़े-दलित भाई सवर्णों की बजाय मुसलमानों को दुश्मन क्यों मानते हैं।मुसलमानों ने तो हमे न तो शिक्षा से रोका न आरक्षण का विरोध किया।
भाजपा सामाजिक न्याय व समानता की विरोधी
   भाजपा आरएसएस की राजनीतिक सन्तति है।आरएसएस का गठन अंग्रेजी सरकार द्वारा शूद्र वर्ण की जातियों के लिए किए गए आरक्षण के विरोध में ही हुआ।सन् 712 से 1857 तक मुसलमानों-मुगलों का शासन था,तब हिन्दू खतरे में नहीं था।जब अंग्रेजों ने भारतीय समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने का कानून बनाये और शूद्रों को पढ़ने- लिखने का कानून बनाये,तो हिन्दू खतरे में पड़ गया।अंग्रेज तो हम लोगों के लिए भगवान बन के आये।
द्रोणाचार्य व अर्जुन पुरस्कार जातिवाद का प्रमाण-
     निषाद पुत्र एकलव्य का अंगूठा ब्राह्मण द्रोणाचार्य ने इसलिए कटवा लिया कि वे अर्जुन से धनुर्विद्या में पारंगत हो गए थे।कैसी विडंबना है कि भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष द्रोणाचार्य व अर्जन पुरस्कार दिया जाता है,जो सवर्णीय जातिवाद का प्रमाण है।पुरस्कार तो वीर एकलव्य के नाम से दिया जाना चाहिए।इस पुरस्कार को अस्सी के दशक में कांग्रेस सरकार ने शुरू किया।यह पिछड़ों,दलितों,आदिवासियों का घोर अपमान है कि जिसने छल-कपट कर एकलव्य का अंगूठा कटवाया और जिसके लिए कटवाया,उनके नाम से पुरस्कार दिया जाता है।यह अन्याय का प्रतीक है।
क्या समाजवादी पार्टी जातिवादियों की पार्टी है?
    जो समाजवादी है वह जातिवादी और जातिवादी समाजवादी नहीं हो सकता।जो सबके हित की कल्पना करे,सबके कल्याण व भलाई का काम करे,सबको साथ लेकर चले वह समाजवादी होता है।मुलायम सिंह यादव अपने एक तरफ जनेश्वर मिश्र,कपिलदेव सिंह,रेवतीरमण सिंहमोहन सिंह,बेनी प्रसाद वर्मा को बैठाते थे,तो दूसरी तरफ ब्रजभूषण तिवारी,धनीराम वर्मा,रमाशंकर कौशिक को बैठाते थे।
       सपा से मोहन सिंह,ओमप्रकाश सिंह,ब्रजभूषण शरण सिंह,राधेमोहन सिंह,नीरज शेखर आदि राजपूत व रेवतीरमण सिंह भूमिहार,ब्रजभूषण तिवारी सांसद बने।2014 में चुनाव हारने पर सपा ने नीरज शेखर, मोहन सिंह, रेवतीरमण सिंह,ब्रजभूषण तिवारी को राज्यसभा में भेजकर सम्मान दिया।जब मोहन सिंह व ब्रजभूषण तिवारी दिवंगत हो गए,तो मोहन सिंह की बेटी कनकलता सिंह व तिवारी के पुत्र आलोक तिवारी को सपा ने राज्यसभा भेजी।जनेश्वर मिश्र को 4-5 बार,अमर सिंह को तीन व किरणमय नन्दा को दो बार राज्यसभा में भेजा।अरबिन्द कुमार सिंह व रामशंकर कौशिक को राज्यसभा में भेजा,फिर भी सवर्ण सपा को जातिवादियों की पार्टी कहते हैं।
अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल में सवर्णों को प्रतिनिधित्व
    माता प्रसाद पांडेय को विधानसभा का अध्यक्ष, डॉ. मनोज कुमार पांडेय,शिवाकांत ओझा, ब्रह्माशंकर त्रिपाठी,राजाराम पांडेय,अभिषेक मिश्रा को कैबिनेट मंत्री, विजय मिश्रा,पवन पांडेय को स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री मंत्री बनाया गया।राजपूत समाज के ओमप्रकाश सिंह, आनन्द सिंह,राजा भैया,अरबिन्द सिंह गोप,राजकिशोर सिंह,राजा अरिदमन सिंह व भूमिहार नारद राय को कैबिनेट मंत्री बनाने के साथ 4-4,5-5 ब्राह्मणों, राजपूतों को स्वतंत्र प्रभार व राज्यमंत्री का पद दिया गया,के बावजूद भी ब्राह्मण,राजपूत कहते थे कि अखिलेश यादव सवर्णों को सम्मान नहीं दे रहे।ऐसा लगता है कि सवर्ण को सम्मान तभी मिलेगा जब उसे सपा मुख्यमंत्री बना दे।
जनेश्वर मिश्रजी व उनके परिवार को सम्मान-अखिलेश यादव जी ने लखनऊ में जनेश्वर मिश्र जी के नाम से एशिया का सबसे बड़ा पार्क बनवाया।उनके भाई तारकेश्वर मिश्रा को कैबिनेट मंत्री व बेटी को राज्यमंत्री का दर्जा दिए।इस सबके बावजूद भी लोकसभा चुनाव में जनेश्वर मिश्रा जी के गाँव के बूथ से सपा प्रत्याशी को मात्र 3 वोट मिला।दूसरे का नहीं तो इनके घर- परिवार का वोट कहाँ गया?
-जाति धर्म से ऊपर उठकर सबके विकास व भलाई के लिए अखिलेश ने किया काम:-
     अखिलेश यादव की सरकार ने 18 लाख इंटर पास विद्यार्थियों को लैपटॉप, लाखों लड़कियों को 30 हजार रुपये कन्याविद्या धन,39 लाख बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता,56 लाख महिलाओं को समाजवादी पेंशन दिए तो क्या यह किसी जाति धर्म विशेष को ही इस योजना का लाभ मिला।गम्भीर बीमारियों(हार्ट, किडनी,कैंसर आदि) के इलाज के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था सपा सरकार द्वारा कराई गई।पुलिस सुबिधा उपलब्ध कराने के लिए डायल यूपी-100,महिलाओं के प्रसव हेतु अस्पताल ले जाने व घर ले आने के लिए 102 नम्बर एम्बुलेंस, मरीजों व घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नम्बर एम्बुलेंस की निःशुल्क व्यवस्था किया गया।गाँव के विकास व ग़रीबों को छत देने के लिए जनेश्वर मिश्र ग्राम्य विकास योजना व लोहिया ग्राम विकास व आवास योजना शुरू किया।मुफ्त पढ़ाई-सिचाई-दवाई योजना को युद्ध स्तर पर शुरू किया। 5 लाख की किसान व मछुआरा दुर्घटना बीमा व सहायता योजना का लाभ दिया।फसल नुकसान सहायता योजना शुरू किया।
     अखिलेश यादव की सरकार ने सबके विकास व कल्याण के लिए जो काम किया,न किसी सरकार ने किया और न करेगी।
समाजवादी मुलायम ने ही दिया पिछड़ों को आरक्षण का हक
    मण्डल कमीशन के तहत पिछड़ी जातियों को समाजवादी मुलायम सिंह यादव ने ही 1994 में 27 प्रतिशत नौकरियों में आरक्षण का हक दिए।शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए पिछड़ों को 27% व अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को 22.5% आरक्षण के साथ ही साथ पंचायती राज अधिनियम-1994 के तहत ग्रामपंचायत, स्थानीय निकाय व नगर निकायों में ओबीसी को 27%,एससी/एसटी को 22.5% व महिलाओं को 33% आरक्षण दिया।मुलायम सिंह यादव की ही देन है कि आज निषाद, लोधी,बिन्द, कश्यप,काछी, कोयरी,कुर्मी,गूजर, बंजारा, बियार,पाल,धनगर,नाई, विश्वकर्मा, प्रजापति,चमार,जाटव,पासी आदि ही नहीं कुंजड़ा,कसाई, फकीर,जुलाहा,अंसारी,गद्दी,घोसी,मनिहार,गिहार,बरई,तेली,कोल,कलवार,मुसहर,बाँसफोर, धरकार, बसोर,गोंड़, खरवार,डोम, खटिक,वाल्मीकि, बहेलिया,पनिका आदि प्रधान,बीडीसी, पार्षद,सभासद,चेयरमैन,प्रमुख,जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर आदि बनने लगे हैं।
      मुलायम सिंह ने ही 2006 में निजी मेडिकल, डेंटल,इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेज में ओबीसी को 27% व एससी/एसटी को 22.5% आरक्षण की व्यवस्था दिए।संघीय नीति की पक्षधर योगी सरकार ने इस आरक्षण व्यवस्था को 13 अप्रैल,2017 को खत्म कर दिया।
भाजपा आरएसएस नियंत्रित पार्टी है जो संघ के ही एजेंडे पर चलती है।इससे पिछड़ों,दलितों,अकलियतों, आदिवासियों के हित की बात सोचना ही मूर्खता है।भाजपा से ओबीसी,एससी, एसटी सांसद, विधायक तो बन सकते हैं,पर उनकी औकात खूंटे में बंधी बकरी व बंधुआ मजदूर जैसी ही होती है।ये पालतू तीतर-बटेर व तोता जैसे ही चरित्र के रहते हैं।हिजड़ों में वर्गीय स्वाभिमान होता है,पर मुर्दा ज़मीर के भाजपाई पिछड़ों-दलितों के पास जातीय व वर्गीय स्वाभिमान होता ही नहीं।ये निजस्वार्थ में मुँह पर पट्टी बांध गूंगे-बहरे बने रहते हैं।
    अतिपिछड़ों को सम्मान व भागीदारी देकर ही बढ़ा जा सकता है- हाँ, सपा में अतिपिछड़ों को जो स्थानव सम्मान मिलना चाहिए था,नहीं मिल पाया।इसलिए भाजपा ने नफरत की भावना भर कर अपनी तरफ कर लिया।आधार वोट के साथ अतिरिक्त वोटबैंक बढाना है,तो अतिपिछड़ों को सम्मान व भागीदारी देनी ही पड़ेगी।सच मायने में अतिपिछड़े ही सत्ता संग्राम में निर्णायक हैं।
        - चौ.लौटन निषाद


Friday, 4 September 2020

वैज्ञानिक तकनीक से अधिक मत्स्य उत्पादन

  1. 1-मत्स्य पालन की आवश्यकता

मछली एक शक्ति वर्धक एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थ है यह खाने में स्वादिष्ट और सुपाच्य होती है। मछली में आवश्यक अमीनो एसिड तथा प्रोटीन की अधिक मात्रा पाई जाती है। इसके अतिरिक्त वसा, कैल्शियम व खनिज भी पाए जाते हैं। जिनके कारण संतुलित आहार में मछली की विशेष उपयोगिता है ऐसे कई उदाहरण हैं जिनसे यह विदित होता है कि प्राचीन काल में भी मछली पालन होता था तथा मछली को आदिकाल से पौष्टिक आहार व मनोरंजन का उत्तम साधन माना गया है जो। मनुष्य के भोजन व देश की अर्थव्यवस्था में मछली की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका अनुभव करते हुए वर्ष 1926 में रॉयल कमीशन ऑफ़ एग्रीकल्चर की संसाधनों के विकास में बल दिया तथा प्रदेश में मत्स्य विभाग की स्थापना के लिए अपना मत रखा। उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता के पूर्व युद्धकाल की  एक आवश्यकता के रूप में मत्स्य विकास कार्यक्रम वर्ष 1944 में प्रारंभ किया गया था। "अधिक अन्न उपजाओ" कार्यक्रम के अंतर्गत उस समय तालाबों से मछली निकालकर सेना के जवानों को भेजे जाने का कार्य किया जाता था। वर्तमान में उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग, मत्स्य पालन के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने के लिए दृढ़ संकल्प है। विशेषकर ग्रामीण अंचलों में सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से पिछड़े लोगों की प्रगति में विभाग द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
भारतीय इतिहास में मछली दर्शन और भोजन दोनों दृष्टि से शुभ और श्रेष्ठ मानी जाती है यह कथन अपने आप में पर्याप्त महत्व रखता है, कि जिस पानी में मछली नहीं है, उस पानी की जल-जैविक स्थिति सामान्य नहीं है। पानी और मछली दोनों एक-दूसरे से काफी जुड़े हैं। पर्यावरण को संतुलित रखने में मछली की विशेष उपयोगिता है। शरीर के पोषण तथा निर्माण में संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। संतुलित आहार की पूर्ति विभिन्न खाद्य पदार्थों को उचित मात्रा में मिलाकर की जा सकती है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज लवण आदि की आवश्यकता होती है। स्वस्थ शरीर के निर्माण हेतु प्रोटीन की अधिक मात्रा होनी चाहिए। मछली, मांस, अंडे, दूध, दालो आदि का उपयोग प्रमुख रूप से किया जाता है। मछलियों में लगभग 70 से 80% पानी 13 से 22% प्रोटीन एक से 3.5% खनिज पदार्थ 0.5 से 2.0% बसा पायी जाती है।  विश्व के सभी देशों में मछली के विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर उपयोग में लाए जाते हैं। मछली एक उच्च कोटि का खाद्य पदार्थ और मत्स्य पालन मत्स्य व्यवसाय के रूप में एक श्रम प्रधान व्यवसाय हैं। इसमें कम पूंजी लगाते हुए अधिकतम लाभ अर्जित जाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। जनसंख्या में निरंतर वृद्धि के परिणाम स्वरुप रोजी-रोटी की समस्या के समाधान के लिए अत्यधिक आवश्यक है कि आज के प्रगतिशील युग में ऐसे कार्यक्रम अपनाए जाएंगे जिनके माध्यम से खाद पदार्थों के उत्पादन के साथ-साथ भूमिहीनों, निर्धनों, बेरोजगारी, मछुआरों आदि के लिए रोजगार के साधनों का सृजन भी हो सके। मछली पालन का व्यवसाय निश्चित ही रोजी रोटी का एक उत्तम साधन है। मत्स्य पालन द्वारा तमाम मुल्य जल संपदा का उपयोग करके उत्तम प्रोटीन युक्त पौष्टिक खाद्य पदार्थ के उत्पादन के साथ-साथ बेरोजगारों और दुर्बल  वर्ग के व्यक्तियों के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी है। 

2. मत्स्य पालन तालाब हेतु स्थल चयन व निर्माण तकनीक

जिस प्रकार कृषि के लिए भूमि आवश्यक है ठीक उसी प्रकार मत्स्य पालन के लिए तालाब की आवश्यकता होती है। ग्रामीण अंचलों में विभिन्न आकार प्रकार के तालाब, पोखरे पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं, जो कि निजी ग्राम सभाओं का  अथवा संस्थाओं की संपत्ति होते हैं।ऐसे जल संसाधन या तो निष्प्रयोज पड़े रहते हैं अथवा उनके उपयोग परंपरागत उपयोग जैसे- मिट्टी निकालने, मवेशियों को पानी पिलाने, सिंघाड़े की खेती,आदि के लिए किया जाता रहा है। मत्स्य पालन हेतु 0.2 हेक्टेयर से बड़े तालाबों का चयन किया जाना किया जाना चाहिए जिनमें वर्ष भर या कम से कम आठ नौ माह पानी भरा रहता है।तालाब की मिट्टी मटियारी, दोमट, काली मिट्टी अधिक उपयोगी होती है। तालाबों का चुनाव क्षेत्र में किया गया जो बाढ़ से प्रभावित ना हो तथा तालाब तक आसानी से पहुंचा जा सके। तालाबों में कमियां स्वाभाविक रूप से पाई जाती हैं। जिसके लिए तालाब का सुधार एक आवश्यक प्रक्रिया है सुधार के अंतर्गत तालाब के कम गहराई वाले स्थान से मिट्टी निकाल कर बाहर स्तर से अधिक ऊंचे बांध का निर्माण करना चाहिए तथा पानी आने वाले वह बाहर निकालने के रास्ते में जाली की व्यवस्था आवश्यक है जिससे पाली जाने वाली मछलियां बाहर न जा सकें और अवनछीय मछलियां तालाब में ना आ सके तालाब सुधार कर माह अप्रैल-मई तक अवश्य कर लेना चाहिए। जिससे मत्स्य पालन समय से प्रारंभ किया जा सके नए तालाब के निर्माण हेतु उपयुक्त स्थल का चयन आवश्यक है नए तालाब के निर्माण के लिए मिट्टी की जल धारण क्षमता व उर्वरता को चयन का आधार माना जाना चाहिए। काली, दोमट, चिकनी मिट्टी, वाली भूमि में तालाब निर्माण उपयुक्त होता है, इस मिट्टी में जल धारण क्षमता अधिक होती है। मिट्टी का पी. एच. 6.5 से 8.0 उपयोगी माना गया हो | तालाब निर्माण के पूर्व मृदा परीक्षण मत्स्य विभाग की प्रयोगशाला अथवा अन्य प्रयोगशालाओं से अवश्य करा लेना चाहिए। नए तालाबों के निर्माण के लिए निम्नांकित बातों पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है-

स्थल चयन-

 1- तालाब हेतु प्रस्तावित स्थल बाढ़ वाले क्षेत्र में नहीं होना चाहिए।
2- गहरे नाले,जलाशय अथवा नदी के समीप वाला स्थान उपयुक्त नहीं होता हैं। 
3- क्योंकि इसमें सीपेज की संभावना बनी रहेगी और तालाब में पानी नहीं रुकेगा। 
4- जमीन निकली होनी चाहिए जिसमें वर्षा का पानी बहकर एकत्रित हो सके। 
5- तालाब निर्माण हेतु प्रस्तावित स्थल के मिट्टी की जांच मिट्टी की उपयुक्त हेतु अवश्य करा लेनी चाहिए। 

तालाब का आकार, साइज व गहराई :-

सामान्यता 0.50 हेक्टेयर से 1.0 हे. क्षेत्रफल का तालाब मत्स्य पालन के लिए अधिक उपयुक्त होता है। तालाब निर्माण आयताकार होना चाहिए। मत्स्य निकासी जाल चलाने आदमी आसानी होती है लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 3:1 आदर्श माना जाता है।  तालाब की गहराई 1.5 से 2 मीटर तक साइज के अनुसार होनी चाहिए। जिससे उसमें कम से कम 1 मीटर पानी हमेशा बना रहे। 

बाँध निर्माण :-

तालाब के चारों तरफ बंधे काफी मजबूत होने चाहिए जिससे तालाब में मछली पालन हेतु पानी का आवश्यकता अनुसार भराव हो सके और रिसाव भी रूक सके। बन्धा के ऊपरी सतह की चौड़ाई कम से कम 1 मीटर होना चाहिए तथा बांधों के हार्जेटल व वर्टिकल स्लोप में 1:5:1 अथवा 2:5:2 का अनुपात होना चाहिए। बांधों के सतह पर छोटी घास लगा देनी चाहिए जिससे बंधो की मजबूती हो ताकि कटाव ना होने पाए। बन्धो पर घने छायादार पेड़ नहीं लगाना चाहिए। केला का पेड़ लगाना सबसे उपयुक्त होता है पूर्व दिशा को छोड़कर तीनों तरफ केले का पेड़ लगाया जा सकता है।
इनलेट/आउटलेट का निर्माण:-
तालाब में पानी आने वहां पर जाने के लिए सीमेंटेड इनलेट व आउटलेट का निर्माण आवश्यक कराना चाहिए। इनलेट आउटलेट पर 1/ 10 इंच मेस साइज की लोहे की काली जाली लगाना चाहिए। जिससे तलाब से मछली के बच्चे/मछलियां बाहर ना जा सके तथा बाहर से आवांछनीय मछलियां तालाब के अंदर न आने पाए। 

मत्स्य पालक कृषक प्रशिक्षण। विदइन डिस्ट्रिक्ट एट के. वी. के

  कठौरा, अमेठी |सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन 'आत्मा' योजना अंतर्गत मत्स्य पालक कृषक प्रशिक्षण। विदइन डिस्ट्रिक्ट एट के. वी. के, ...