क्यों
अत्याधिक पौष्टिक आहार एवं तथा शीघ्र पाचक हेतु।
देश की बढ़ती जनसंख्या के लिए पौष्टिक खाद्य पदार्थ एवं कुपोषण की समस्या के समाधान हेतु।
देश को पौष्टिक प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ उत्पादन में स्वावलंबी बनाने हेतु।
खाद्य सामग्री के उत्पादन में भाग लेने वाले पोखराो एवं तालाबों से पौष्टिक खाद्य सामग्री मछली के रूप में।
उत्पादन करने एवं उनकी उत्पादन क्षमता का पूर्ण रूप से उपयोग करने हेतु।
कहाँ
प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में तालाब,उपलब्ध है, निम्नलिखित प्रकार के तालाबों में मत्स्य पालन किया जा सकता है-
साल भर 1.5 मीटर से 2 मीटर गहरा पानी हर मौसम में उपलब्ध रहे बाढ़ का प्रभाव ना पड़ता हो।
नालें अथवा नदी से सीधे ना मिलते हो।
किसी भी प्रकार की जलीय घास ना हो।
फैक्ट्री का गंदा पानी ना आता हो।
कैसे
तालाबों में मत्स्य पालन निम्न बातों को ध्यान में रखकर आरंभ करें-
तालाब की गहराई इतनी रखें कि उसमें 1.5 मीटर से 2 मीटर तक पानी साल भर भरा रह सके
तालाब में सभी बंधओं को ठीक करा दें, जिससे वर्षा का प्रभाव ना पड़े बांध क्षतिग्रस्त ना हो और मछलियां तालाब से बाहर ना जा सके
पानी के आने के रास्तों पर लोहे की जाली लगाएं जिससे कि अधिक पानी ना आ सके तथा अनावश्यक पानी बाहर निकाला जा सके तथा बांध टूटने से बच सकें एवं मछलियां जाली से ना तो बाहर जा सके और बाहर की मछलियां अंदर न आ सके
तालाब की जलीय घास को निकाल दिया जाए
तालाब में पानी वाली मछलियों को हानि पहुंचाने वाले कीड़ों एवं मछलियों को निकलवा दें इस कार्य हेतु महुआ की खली 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में बुलवा कर तालाब में छिड़काव करें। महुआ की खली के प्रयोग से मरी मछलियों को खाने के प्रयोग में लिया जा सकता है।
तालाब में चूने का प्रयोग 2 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से करें। तालाब में गोबर की खाद 10 टन से 20 टन 10 किस्तों में डाले यह कार्य चुना डालने के 20 दिन बाद करें।
गोबर की खाद डालने के 15 दिन के बाद अकार्बनिक खाद का मिश्रण (अमोनियम सुपर फास्फेट म्यूरेट आफ पोटाश) 740 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 10 किस्तों में डालें तालाब के पानी का निरीक्षण करते रहे जब तालाब उपरोक्त खादों के प्रयोग से तालाब में 15 से 21 दिनों के भीतर ताला में मछलियों का भोजन पैदा होना आरंभ हो जाएगा इसके बाद 10000 अंगुलिका प्रति हेक्टेयर की दर से संचय करें।
अंगुलिका संचय उपरांत अंगुलिका को 1 माह से 3 माह तक पूरक आहार देना चाहिए जिससे कि अंगुलिका शीघ्र बढ़ सके मूंगफली की खली अथवा सरसों की खली एवं कना बराबर भाग में मिलाकर 1 से 3% मछली के भार के अनुसार देना उचित होगा।
अंगुलिकाओ पूरक भोजन प्रतिदिन निश्चित स्थान एवं निश्चित समय पर दिया जाए।
प्रत्येक माह तालाब में जाल चलवा कर मछलियों की बाढ़ व स्वास्थ्य का परीक्षण करते रहे।
बीमारियों से बचाव
विगत वर्षों में तालाबों में अल्सरेटिव सिंड्रोम नामक बीमारी प्रकाश में आई है जिसके फलस्वरूप मछलियों में असमान्य व्यवहार शरीर पर लाल चकत्ते का पडना घाव हो जाना पूछ सड़ना वह गिर जाना आदि प्रमुख लक्षण है-
रोग ग्रस्त मछलियों को निकाल कर जमीन में गाड़ दें एक तालाब में चलाया गया जाल पहले साफ करके सुखा लिया जाए तभी उसे दूसरे तालाब में चलाया जाए
तालाब में 375 से 625 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुझे हुए चूने का छिड़काव तीन 3 सप्ताह के अंतराल पर 4 बार कराया जाए
पानी अधिक प्रदूषित होने पर 1250 से 1875 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से परामर्श पर नमक डाला जाए
0.50 पीपीएम पोटेशियम परमैंगनेट का प्रयोग लाभकारी है इस तालाब में रोग नहीं है उसमें भी सावधानी स्वरूप ढाई सौ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुझे चूने का प्रयोग किया जाए।
एक्वा हेल्थ दवा का प्रयोग 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से लाभकारी है।
आदर्श तालाब
तालाब के चारों ओर के बंधे मजबूत एवं बंधे का ऊपरी भाग 2 मीटर चौड़ा तथा डाल एक अनुपात 2:00 के अनुपात में हो
तालाब में जलीय घास आदि ना हो तालाब में पानी के आने व जाने के रास्ते में लोहे की जाली लगी हो
तालाब का पल हर स्थान पर समतल हो जिससे कि जाल के प्रयोग में कठिनाई ना हो
तालाब में हर ऋतु में 1.5 से 2 मीटर तक पानी भरा रहे एवं पानी भरने का साधन हो
तालाब में अवांछनीय मछलियां ना हो
चूने का प्रयोग निर्धारित मात्रा एवं समय से किया गया हो।
खाद, उर्वरक व पूरक भोजन का प्रयोग निर्धारित समय व मात्रा में किया गया हो निर्धारित मात्रा अर्थात 5000 से 10000 अंगुलिका प्रति हेक्टेयर का संचय किया गया हो।
आवश्यकता है
कि देश की बढ़ती खाद्य समस्या के समाधान में आप भी भाग ले तथा अपने क्षेत्र के समस्त जल क्षेत्र का उपयोग करें एवं मछलियों के रूप में पौष्टिक खाद्य का उत्पादन करें। अपने आर्थिक दशा में सुधार लाएं।
कब क्या करें
10000 किलोग्राम गोबर खाद व 740 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रसायनिक खाद किस्तों में प्रयोग करें।
मई (प्रथम सप्ताह) तालाब के बन्धो की मरम्मत कार्य पूर्ण करने के उपरांत अनावश्यक मछलियों एवं जलीय पौधों की सफाई।
मई (द्वितीय सप्ताह) चूने का प्रयोग 2 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से करें।
जून (प्रथम सप्ताह) खादी करण गोबर की खाद से।
जून ( तृतीय सप्ताह) उर्वरक का प्रयोग (अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश)
जुलाई (प्रथम सप्ताह) कीड़े मकोड़ों की सफाई तथा प्लॉक्टॉन के उत्पादन का निरीक्षण अंगुलीका संचय।
अगस्त (आरंभ में) पूरक आहार एवं गोबर की खाद का प्रयोग।
अगस्त (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग।
सितंबर( आरंभ में) पूरक आहार का प्रयोग।
सितंबर( द्वितीय सप्ताह) गोबर की खाद से खादी करण एवं अंगुलिका के स्वास्थ्य का निरीक्षण।
सितंबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग।
अक्टूबर (प्रथम सप्ताह) गोबर की खाद का प्रयोग।
अक्टूबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग।
नवंबर (प्रथम सप्ताह) गोबर की खाद का प्रयोग
नवंबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग
नवंबर (चतुर्थ सप्ताह) अंगुलिकाओ के स्वास्थ्य एवं प्लैकटाॅन का निरीक्षण
दिसंबर पूर्व वर्ष की पाली मछलियों की शिकार माही, खादीकरण गोबर व उर्वरक का प्रयोग।
जनवरी पूर्व वर्ष के पाली मछलियों की शिकार माही।खादीकरण (गोबर व उर्वरक)
फरवरी खादीकरण (गोबर व उर्वरक)
अप्रैल खादीकरण (गोबर व उर्वरक)
मत्स्य पालक विकास अभिकरण का उद्देश्य
ग्राम सभा के तालाबों का सर्वेक्षण एवं सुधार योग्य उपयुक्त तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर दिलाना।
तालाबों के सुधार हेतु आगणन एवं परियोजना तैयार कर सुधार एवं इनपुट्स हेतु बैंक से ऋण दिलाना एवं स्वीकृति पर अनुदान देना।
चयनित व्यक्ति को आधुनिक मत्स्य पालन विधि में प्रशिक्षित किया जाना।
मत्स्य पालकों को आवश्यकता अनुसार मत्स्य बीजों की पूर्ति कराना।
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