Tuesday, 29 December 2020

आधुनिक मत्स्य पालन। मत्स्य पालक विकास अभिकरण (आत्मा योजना)

            
क्यों
अत्याधिक पौष्टिक आहार एवं तथा शीघ्र पाचक हेतु।
 देश की बढ़ती जनसंख्या के लिए पौष्टिक खाद्य पदार्थ एवं कुपोषण की समस्या के समाधान हेतु। 
 देश को पौष्टिक प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ उत्पादन में स्वावलंबी बनाने हेतु। 
 खाद्य सामग्री के उत्पादन में भाग लेने वाले पोखराो एवं तालाबों से पौष्टिक खाद्य सामग्री मछली के रूप में। 
 उत्पादन करने एवं उनकी उत्पादन क्षमता का पूर्ण रूप से उपयोग करने हेतु। 
कहाँ 
 प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में तालाब,उपलब्ध है, निम्नलिखित प्रकार के तालाबों में मत्स्य पालन किया जा सकता है-
 साल भर 1.5 मीटर से 2 मीटर गहरा पानी हर मौसम में उपलब्ध रहे बाढ़ का प्रभाव ना पड़ता हो। 
 नालें अथवा नदी से सीधे ना मिलते हो। 
 किसी भी प्रकार की जलीय घास ना हो। 
फैक्ट्री का गंदा पानी ना आता हो। 
कैसे 
तालाबों में मत्स्य पालन निम्न बातों को ध्यान में रखकर आरंभ करें-
तालाब की गहराई इतनी रखें कि उसमें 1.5 मीटर से 2 मीटर तक पानी साल भर भरा रह सके
तालाब में सभी बंधओं को ठीक करा दें, जिससे वर्षा का प्रभाव ना पड़े बांध क्षतिग्रस्त ना हो और मछलियां तालाब से बाहर ना जा सके
पानी के आने के रास्तों पर लोहे की जाली लगाएं जिससे कि अधिक पानी ना आ सके तथा अनावश्यक पानी बाहर निकाला जा सके तथा  बांध टूटने से बच सकें एवं मछलियां जाली से ना तो बाहर जा सके और बाहर की मछलियां अंदर न आ सके
तालाब की जलीय घास को निकाल दिया जाए 
तालाब में पानी वाली मछलियों को हानि पहुंचाने वाले कीड़ों एवं मछलियों को निकलवा दें इस कार्य हेतु महुआ की खली 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में बुलवा कर तालाब में छिड़काव करें। महुआ की खली के प्रयोग से मरी मछलियों को खाने के प्रयोग में लिया जा सकता है। 
तालाब में चूने का प्रयोग 2 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से करें। तालाब में गोबर की खाद 10 टन से 20 टन 10 किस्तों में डाले यह कार्य चुना डालने के 20 दिन बाद करें। 
गोबर की खाद डालने के 15 दिन के बाद अकार्बनिक खाद का मिश्रण (अमोनियम सुपर फास्फेट म्यूरेट आफ पोटाश) 740 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 10 किस्तों में डालें तालाब के पानी का निरीक्षण करते रहे जब तालाब उपरोक्त खादों के प्रयोग से तालाब में 15 से 21 दिनों के भीतर ताला में मछलियों का भोजन पैदा होना आरंभ हो जाएगा इसके बाद 10000 अंगुलिका  प्रति हेक्टेयर की दर से संचय करें। 
अंगुलिका  संचय उपरांत अंगुलिका को 1 माह से 3 माह तक पूरक आहार देना चाहिए जिससे कि अंगुलिका  शीघ्र बढ़ सके मूंगफली की खली अथवा सरसों की खली एवं कना बराबर भाग में मिलाकर 1 से 3% मछली के भार के अनुसार देना उचित होगा।
अंगुलिकाओ पूरक भोजन प्रतिदिन निश्चित स्थान एवं निश्चित समय पर दिया जाए। 
प्रत्येक माह तालाब में जाल चलवा कर मछलियों की बाढ़ व स्वास्थ्य का परीक्षण करते रहे। 
बीमारियों से बचाव 
विगत वर्षों में तालाबों में अल्सरेटिव सिंड्रोम नामक बीमारी प्रकाश में आई है जिसके फलस्वरूप मछलियों में असमान्य व्यवहार शरीर पर लाल चकत्ते का पडना घाव हो जाना पूछ सड़ना वह गिर जाना आदि प्रमुख लक्षण है-
रोग ग्रस्त मछलियों को निकाल कर जमीन में गाड़ दें एक तालाब में चलाया गया जाल पहले साफ करके सुखा लिया जाए तभी उसे दूसरे तालाब में चलाया जाए 
तालाब में 375 से 625 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुझे हुए चूने का छिड़काव तीन 3 सप्ताह के अंतराल पर 4 बार कराया जाए 
पानी अधिक प्रदूषित होने पर 1250 से 1875 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से परामर्श पर नमक डाला जाए 
0.50 पीपीएम पोटेशियम परमैंगनेट का प्रयोग लाभकारी है इस तालाब में रोग नहीं है उसमें भी सावधानी स्वरूप ढाई सौ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुझे चूने का प्रयोग किया जाए। 
एक्वा हेल्थ दवा का प्रयोग 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से लाभकारी है। 
 आदर्श तालाब
तालाब के चारों ओर के बंधे मजबूत एवं बंधे का ऊपरी भाग 2 मीटर चौड़ा तथा डाल एक अनुपात 2:00 के अनुपात में हो 
तालाब में जलीय घास आदि ना हो तालाब में पानी के आने व जाने के रास्ते में लोहे की जाली लगी हो
 तालाब का पल हर स्थान पर समतल हो जिससे कि जाल के प्रयोग में कठिनाई ना हो 
तालाब में हर ऋतु में 1.5 से 2 मीटर तक पानी भरा रहे एवं पानी भरने का साधन हो 
तालाब में  अवांछनीय मछलियां ना हो 
चूने का प्रयोग निर्धारित मात्रा एवं समय से किया गया हो। 
खाद, उर्वरक व पूरक भोजन का प्रयोग निर्धारित समय व मात्रा में किया गया हो निर्धारित मात्रा अर्थात 5000 से 10000 अंगुलिका प्रति हेक्टेयर का संचय किया गया हो। 
 आवश्यकता है
कि देश की बढ़ती खाद्य समस्या के समाधान में आप भी भाग ले तथा अपने क्षेत्र के समस्त जल क्षेत्र का उपयोग करें एवं मछलियों के रूप में पौष्टिक खाद्य का उत्पादन करें। अपने आर्थिक दशा में सुधार लाएं।
कब क्या करें
 10000 किलोग्राम गोबर खाद व 740 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रसायनिक खाद किस्तों में प्रयोग करें। 
मई (प्रथम सप्ताह) तालाब के बन्धो की मरम्मत कार्य पूर्ण करने के उपरांत अनावश्यक मछलियों एवं जलीय पौधों की सफाई। 
मई (द्वितीय सप्ताह) चूने का प्रयोग 2 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से करें।
जून (प्रथम सप्ताह) खादी करण गोबर की खाद से।
जून ( तृतीय सप्ताह)  उर्वरक का प्रयोग (अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश) 
 जुलाई (प्रथम सप्ताह) कीड़े मकोड़ों की सफाई तथा प्लॉक्टॉन के उत्पादन का निरीक्षण अंगुलीका संचय।
अगस्त (आरंभ में) पूरक आहार एवं गोबर की खाद का प्रयोग।
अगस्त (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग। 
सितंबर( आरंभ में) पूरक आहार का प्रयोग। 
सितंबर( द्वितीय सप्ताह) गोबर की खाद से खादी करण एवं अंगुलिका के स्वास्थ्य का निरीक्षण।
सितंबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग। 
अक्टूबर (प्रथम सप्ताह) गोबर की खाद का प्रयोग। 
अक्टूबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग। 
नवंबर (प्रथम सप्ताह) गोबर की खाद का प्रयोग
नवंबर (तृतीय सप्ताह) उर्वरक खाद का प्रयोग
नवंबर (चतुर्थ सप्ताह) अंगुलिकाओ के स्वास्थ्य एवं प्लैकटाॅन का निरीक्षण
 दिसंबर पूर्व वर्ष की पाली मछलियों की शिकार माही, खादीकरण गोबर व उर्वरक का प्रयोग। 
जनवरी पूर्व वर्ष के पाली मछलियों की शिकार माही।खादीकरण (गोबर व उर्वरक) 
फरवरी खादीकरण (गोबर व उर्वरक) 
अप्रैल खादीकरण (गोबर व उर्वरक) 
मत्स्य पालक विकास अभिकरण का उद्देश्य
ग्राम सभा के तालाबों का सर्वेक्षण एवं सुधार योग्य उपयुक्त तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर दिलाना। 
तालाबों के सुधार हेतु आगणन एवं परियोजना तैयार कर सुधार एवं इनपुट्स हेतु बैंक से ऋण दिलाना एवं स्वीकृति पर अनुदान देना। 
चयनित व्यक्ति को आधुनिक मत्स्य पालन विधि में प्रशिक्षित किया जाना। 
मत्स्य पालकों को आवश्यकता अनुसार मत्स्य बीजों की पूर्ति कराना। 

Friday, 25 December 2020

निषाद मछुआ किसानों की समस्याओं को लेकर अमेठी सांसद/केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को प्रार्थना पत्र सौंपा

 

सिंहपुर, अमेठी। निषाद मछुआ किसानों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय निषाद संघ के जिला अध्यक्ष की अगुवाई में पदाधिकारियों द्वारा अमेठी सांसद/केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी प्रार्थना सौंपा गया है शुक्रवार को सिंहपुर राम लीला मैदान किसान गोष्ठी कार्यक्रम में नेशनल एसोसिएशन आफ फिशरमैन जिला अध्यक्ष के द्वारा सौंपे गए प्रार्थना पत्र मे लिखाा हैकि  शाशनादेश के क्रम में मत्स्य पालकों व मछुआ किसानों का बैंक द्वारा क्रेडिट कार्ड बनाए जाने का निर्देश हुआ था। परंतु आज तक जनपद में किसी भी मछुआ समुदाय/मत्स्य पालक व मछुआ किसानों का केवल  1% किसान क्रेडिट कार्ड बनाया गया है। मछुआ किसान बैंक जाता है तो बैंक अधिकारी कर्मचारी तीन से चार महीने दौड़ा दौड़ा कर परेशान कर रहे हैं। कमीशन बिना नहीं करते मछुवा किसानों की फाइल, फाईल बैंक से वापस मत्स्य विभाग भेज देते हैं । 
उन्होंने लिखा है कि राजस्व विभाग श्रेणी6 की भूमि जो राजस्व खतौनी में जलमग्न,नदी नाला, झील झाबर दर्ज,कृषि योग्य भूमि पर आसामी पट्टे की भाँति मछुआ समुदाय के व्यक्तियों को प्रत्येक ग्राम पंचायत में कृषि हेतु पट्टे आवंटित किए जाएं। जिन तालाबों में बंधा निर्माण नहीं है पूरे वर्ष पानी नहीं रुकता है या मछली पालने योग्य नहीं है। उन तालाबों को शासनादेश 6 जुलाई 1987 के तहत सिंघाड़ा उत्पादन/कृषि कार्य पर रोक न लगाई जाए। और प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 50 मछुआ आवास का निर्माण करवाने की मांग की, विगत वर्षों से नहीं आया मछुआ आवास अमेठी।इस मौके पर  जिला अध्यक्ष के साथ, दीपक कश्यप, सूरज कश्यप, सहदेव , रामगुलाम कश्यप,विजय,सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। 

Wednesday, 23 December 2020

मण्डल विरोधी भाजपा नहीं हो सकती कभी पिछड़ों की हितैशी -लौटन निषाद

देश में जरूरत है वन नेशन वन एजुकेशन की, निजी शिक्षण संस्थानों में एससी/एसटी का आरक्षण खत्म करना आरएसएस की सोच


लखनऊ।राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव लौटन  निषाद ने कहा कि भाजपा संघ के इशारे पर पिछड़ों दलितों, आदिवासियों को शिक्षा से वंचित करने व सामाजिक अन्याय का शिकार बनाने के काम में जुटी हुयी है। प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के एक महीना के अन्दर ही योगी ने निजी मेडिकल, डेन्टल व इंजीनियरिंग कालेजों में मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा ओबीसी को 27 प्रतिशत व एससी/एसटी को 22.5 प्रतिशत आरक्षण की की गयी व्यवस्था को खत्म कर दिया। यही नहीं मुलायम सिंह यादव जी व अखिलेश यादव जी द्वारा सभी वर्ग व समुदाय के विद्यार्थियों की आगे की शिक्षा के लिए छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था किये थे। योगी सरकार ने पिछड़े दलित वर्ग के विद्यार्थियों की छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था को निष्प्रभावी कर दिया। उन्होंने कहा कि संघ के इशारे पर लोक सेवा आयोग व उच्च न्याय पालिका पिछड़ा-दलित वर्ग का आरक्षण खत्म करने के काम में जुटा हुआ है। भाजपा पिछड़े वर्ग को सामाजिक अन्याय, उत्पीड़न व अत्याचार का शिकार बनाने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ी हुयी है।
       निषाद ने कहा कि मण्डल विरोधी भाजपा कभी पिछड़ों की हितैशी नहीं हो सकती। भाजपा फूट डालों और शासन करो की नीति पर चलते हुए पिछड़ा-अतिपिछड़ा व दलित-अतिदलित के बीच नफरत की भावना पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाया। अखिलेश यादव की सपा सरकार को एक जाति विशेष की सरकार होने का दुष्प्रचार कर अतिपिछड़ों को गुमराह करने व सपा विरोधी बनाने का काम किया। अतिपिछड़ों ने सामाजिक न्याय व संरक्षा की लड़ाई आगे होकर लड़ने वाले यादव समाज को अपना विरोधी मानकर सपा के विरूद्ध हो गया। योगी सरकार की पिछड़ा -दलित विरोधी नीतियों से धर्म की घुट्टी पीकर भाजपा के झॉसे में आने वाले पिछड़े दलित पछता रहे हैं।
      निषाद ने कहा कि आरएसएस का जन्म सामाजिक न्याय के ही विरोध में हुआ। जब ब्रिटिश हुकुमत ने भारत सरकार अधिनियम-1919 के माध्यम से पूरे देश में हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अन्तर्गत शूद्र कहीं जाने वाली जातियों को शिक्षा व नौकरियों में प्रतिनिधित्व हेतु डिप्रेस्ड क्लास के नाम पर आरक्षण दिया तो मनुसंविधान समर्थक जातियों ने पहले हिन्दू महासभा और बाद में 1925 में आरएसएस का गठन किया।आरएसएस कांग्रेस की सन्तति है और भाजपा आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी है। भाजपा संघ के रिमोट कन्ट्रोल से संचालित होती है। आरएसएस ने मण्डल कमीशन की रिपोर्ट न लागू करने की शर्त पर 1980 में इन्दिरा गांधी व 1985 में राजीव गांधी को समर्थन दिया। जनता दल की सरकार ने 7 अगस्त,1990 को जब सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था का निर्णय लिया तो भाजपा ने कमण्डल लेकर सोमनाथ से अयोध्या में मंदिर बनाने का मुद्दा उछाल राम रथ यात्रा पर सवार हो गयी।भाजपा पिछड़ों दलितों के साथ यूज एण्ड थ्रो की पॉलिसी अपनाती है। भाजपा में जो ओबीसी,एससी नेता हैं वे अपने जाति व जमात के साथ हर स्तर पर हो रहे सामाजिक अन्याय व अत्याचार पर चुप्पी साधे गंगू बहरे बने बठे हैं और उनका जमीर मर चुका है।उन्होंने वन नेशन वन एजुकेशन की मांग करते हुए कहा कि दोहरी शिक्षा नीति भेदभावपूर्ण है। - Lautan Nishad

Monday, 21 December 2020

भाजपा सरकार पिछड़ों-दलितों को सामाजिक न्याय से वंचित करने में जुटी -लौटन राम निषाद

ओबीसी की जातिगत जनगणना करने व कोलेजियम सिस्टम खत्म करने की मांग

लखनऊ।राष्ट्रीय निषाद संघ(एन ए एफ) के राष्ट्रीय सचिव चौ० लौटन राम निषाद ने केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार पर पिछड़ों-दलितों को सामाजिक न्याय से वंचित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब से केन्द्र व उप्र में भाजपा की सरकार बनी है, पिछड़े -दलित वर्ग के आरक्षण पर कुठाराघात किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने को पिछड़ी जाति का बताते हैं।यदि वे पिछड़ी जाति के हैं तो ओबीसी की जातिगत जनगणना उजागर कर ओबीसी को सभी स्तरों पर जनसंख्यानुपाती आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सवर्ण जातियों को 72 घण्टे के अन्दर संविधान व उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परे जाते हुए जब 10 प्रतिशत आरक्षण दे दिया तो मण्डल कमीशन के तहत 52 प्रतिशत आरक्षण देने का कदम उठाना चाहिये। उ.प्र. सरकार की सामाजिक न्याय समिति-2001 के अनुसार अन्य पिछड़े वर्ग की संख्या 54 प्रतिशत स्वीकार की गयी है तो ओबीसी को 27 प्रतिशत ही आरक्षण क्यों? उन्होंने कहा कि एससी/एसटी की भांति ओबीसी को जनसंख्यानुपाती आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन कराया जाय।
         निषाद ने कहा कि केन्द्र सरकार सेन्सस-2011 के अनुसार एससी, एसटी, धार्मिक अल्पसंख्यक (जैन, बौद्ध, पारसी, मुस्लिम, सिख, इसाई, रेसलर आदि) के साथ-साथ ट्रान्सजेन्डर व दिव्यांग की जनगणना उजागर कर दी गयीं। लेकिन ओबीसी की जनगणना को घोषित नहीं किया गया। उन्होंने कार्यपालिका के साथ-साथ विधायिका, न्याय पालिका, पदोन्नति एवं निजी क्षेत्र के उपक्रमों, संस्थानों व केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी को आरक्षण देने तथा ओबीसी आरक्षण को 9 वीं अनुसूचि में दर्ज करने की मांग किया है। उन्होंने केन्द्र सरकार से सेन्सस -2021 में  जातिगत जनगणना कराने, कोलेजियम सिस्टम खत्म कर उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों का चयन संघ लोक सेवा आयोग व लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा के पैटर्न पर राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग के माध्यम से कराने की मांग किया है।
          निषाद ने कहा कि केन्द्र सरकार सरकारी उपक्रमों, संस्थानों का निजीकरण कर व प्रदेश सरकार संविदा, आउट सोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियाँ कर ओबीसी, एससी, एसटी के आरक्षण को कुंद व निष्प्रभावी कर रही है। उन्होंने कहा कि जूनियर व सीनियर ज्यूडिसियरी में ओबीसी, एससी व एसटी को आरक्षण की व्यवस्था है,परन्तु उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की व्यवस्था न होने से वंचित वर्ग संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं । उन्होंने उच्च न्यायपालिका में कोलेजियम सिस्टम से न्यायाधीशों का मनोंयन न कर संघ लोक सेवा आयोग व लोक सेवा आयोग के पैटर्न पर राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग के द्वारा  त्रिस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से न्यायाधीशों का चयन किये जाने की मांग उठाया है।
-Form Facebook 

मत्स्य पालक कृषक प्रशिक्षण। विदइन डिस्ट्रिक्ट एट के. वी. के

  कठौरा, अमेठी |सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन 'आत्मा' योजना अंतर्गत मत्स्य पालक कृषक प्रशिक्षण। विदइन डिस्ट्रिक्ट एट के. वी. के, ...