Sunday, 24 January 2021

सेन्सस-2021 में जातिवार जनगणना व समानुपातिक आरक्षण कोटा की मांग - चौ. लौटान निषाद

"जननायक कर्पूरी ठाकुर जी जयंती पर हकदारी की  मांग उठी"

        लखनऊ,24 जनवरी।पिछडों को अपनी लड़ाई लड़ने के लिए जातीय दायरे से ऊपर उठकर वर्गीय भावना पैदा करनी होगी।यह कैसी विडम्बना है कि "हिजड़ों/किन्नरों की जनगणना कराई जाती है,पर अगड़ों व पिछडों की नहीं।" सेन्सस-2021 में जातिवार जनगणना कराने की मांग को लेकर पिछडों को आगे आने की जरूरत है।जननायक कर्पूरी ठाकुर की 97वीं जयंती के आयोजन जनेश्वर मिश्रा पार्क में कमलेश उर्फ भानु यादव की अध्यक्षता में किया गया।इस अवसर पर  समाजवादी पार्टी पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटन निषाद ने कर्पूरी जी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ठाकुर जी सच्चे समाजवादी,सामाजिक न्याय के पुरोधा  सादा जीवन उच्च विचार के धनी महामानव थे।उनका जीवन अनुकरणीय है। कहा कि पिछडेवर्ग की जातियाँ फिरकापरस्ती की भावना का शिकार हो अपनी ताकत को कमजोर कर रही हैं।जबतक अपना पिछड़ा समाज यादव, निषाद, कश्यप,लोधी,कुशवाहा,शाक्य,प्रजापति,विश्वकर्मा,सैनी,गुर्जर,जाट,साहू, बिन्द, बियार राजभर,चौहान आदि के खाँचे से बाहर निकलकर वर्गीय आधार पर एकजुट नहीं होगीं, सामाजिक अन्याय की शिकार होती रहेंगी।कहा कि भाजपा नफरत व दहशत की राजनीति करने वाली फिरकापरस्त पार्टी है।मण्डल विरोधी भाजपा कभी पिछडों की हितैषी नहीं हो सकती।भाजपा व संघ ने यादव-ग़ैरयादव, जाटव-ग़ैरजाटव व हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत की भावना पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाया।कमण्डल की राजनीति को जवाब देने के लिए मण्डल व अम्बेडकरवाद को आगे करना होगा।भाजपा से संविधान, लोकतंत्र व आरक्षण को खतरा उत्पन्न होता जा रहा है।
         निषाद ने सेन्सस-2021 में जातिवार जनगणना कराने, एससी/एसटी की भांति ओबीसी को भी कार्यपालिका, विधायिका में समानुपातिक आरक्षण कोटा दिए जाने की मांग उठाया।उन्होंने कहा कि समाजवादी समता सम्पन्नता के पक्षधर व हकदारी के पैरोकार होते हैं।उन्होंने कहा कि  जूनियर व सीनियर ज्यूडिशियरी में कोटा है तो हायर ज्यूडिशियरी में क्यों नहीं?लोकसेवकों का चयन(सेलेक्शन) संघ लोक सेवा आयोग,लोक सेवा आयोग,कर्मचारी चयन आयोग,अधीनस्थ कर्मचारी सेवा चयन आयोग  की प्रतियोगी परीक्षा के द्वारा व जनप्रतिनिधियों का चुनाव(इलेक्शन) जनमत से होता है तो उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों का कॉलेजियम से मनोनयन(नॉमिनेशन) द्वारा क्यों?कॉलेजियम एक अनोखी परम्परा है।उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का कॉलेजियम से मनोनयन नहीं बल्कि राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग/भारतीय विधिक सेवा आयोग के द्वारा प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होना चाहिए।
     इस अवसर पर योगेश महाराज,ताहिर हुसैन,अजित यादव, कौशल किशोर,अनुराग सिंह अन्नु, पीयूष यादव, रविन्द्र चौहान आदि भी अपना विचार व्यक्त किये।
                

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