Wednesday, 23 December 2020

मण्डल विरोधी भाजपा नहीं हो सकती कभी पिछड़ों की हितैशी -लौटन निषाद

देश में जरूरत है वन नेशन वन एजुकेशन की, निजी शिक्षण संस्थानों में एससी/एसटी का आरक्षण खत्म करना आरएसएस की सोच


लखनऊ।राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव लौटन  निषाद ने कहा कि भाजपा संघ के इशारे पर पिछड़ों दलितों, आदिवासियों को शिक्षा से वंचित करने व सामाजिक अन्याय का शिकार बनाने के काम में जुटी हुयी है। प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के एक महीना के अन्दर ही योगी ने निजी मेडिकल, डेन्टल व इंजीनियरिंग कालेजों में मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा ओबीसी को 27 प्रतिशत व एससी/एसटी को 22.5 प्रतिशत आरक्षण की की गयी व्यवस्था को खत्म कर दिया। यही नहीं मुलायम सिंह यादव जी व अखिलेश यादव जी द्वारा सभी वर्ग व समुदाय के विद्यार्थियों की आगे की शिक्षा के लिए छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था किये थे। योगी सरकार ने पिछड़े दलित वर्ग के विद्यार्थियों की छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था को निष्प्रभावी कर दिया। उन्होंने कहा कि संघ के इशारे पर लोक सेवा आयोग व उच्च न्याय पालिका पिछड़ा-दलित वर्ग का आरक्षण खत्म करने के काम में जुटा हुआ है। भाजपा पिछड़े वर्ग को सामाजिक अन्याय, उत्पीड़न व अत्याचार का शिकार बनाने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ी हुयी है।
       निषाद ने कहा कि मण्डल विरोधी भाजपा कभी पिछड़ों की हितैशी नहीं हो सकती। भाजपा फूट डालों और शासन करो की नीति पर चलते हुए पिछड़ा-अतिपिछड़ा व दलित-अतिदलित के बीच नफरत की भावना पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाया। अखिलेश यादव की सपा सरकार को एक जाति विशेष की सरकार होने का दुष्प्रचार कर अतिपिछड़ों को गुमराह करने व सपा विरोधी बनाने का काम किया। अतिपिछड़ों ने सामाजिक न्याय व संरक्षा की लड़ाई आगे होकर लड़ने वाले यादव समाज को अपना विरोधी मानकर सपा के विरूद्ध हो गया। योगी सरकार की पिछड़ा -दलित विरोधी नीतियों से धर्म की घुट्टी पीकर भाजपा के झॉसे में आने वाले पिछड़े दलित पछता रहे हैं।
      निषाद ने कहा कि आरएसएस का जन्म सामाजिक न्याय के ही विरोध में हुआ। जब ब्रिटिश हुकुमत ने भारत सरकार अधिनियम-1919 के माध्यम से पूरे देश में हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अन्तर्गत शूद्र कहीं जाने वाली जातियों को शिक्षा व नौकरियों में प्रतिनिधित्व हेतु डिप्रेस्ड क्लास के नाम पर आरक्षण दिया तो मनुसंविधान समर्थक जातियों ने पहले हिन्दू महासभा और बाद में 1925 में आरएसएस का गठन किया।आरएसएस कांग्रेस की सन्तति है और भाजपा आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी है। भाजपा संघ के रिमोट कन्ट्रोल से संचालित होती है। आरएसएस ने मण्डल कमीशन की रिपोर्ट न लागू करने की शर्त पर 1980 में इन्दिरा गांधी व 1985 में राजीव गांधी को समर्थन दिया। जनता दल की सरकार ने 7 अगस्त,1990 को जब सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था का निर्णय लिया तो भाजपा ने कमण्डल लेकर सोमनाथ से अयोध्या में मंदिर बनाने का मुद्दा उछाल राम रथ यात्रा पर सवार हो गयी।भाजपा पिछड़ों दलितों के साथ यूज एण्ड थ्रो की पॉलिसी अपनाती है। भाजपा में जो ओबीसी,एससी नेता हैं वे अपने जाति व जमात के साथ हर स्तर पर हो रहे सामाजिक अन्याय व अत्याचार पर चुप्पी साधे गंगू बहरे बने बठे हैं और उनका जमीर मर चुका है।उन्होंने वन नेशन वन एजुकेशन की मांग करते हुए कहा कि दोहरी शिक्षा नीति भेदभावपूर्ण है। - Lautan Nishad

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