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सवर्ण जाति देखकर वोट करता है,पार्टी के नाम पर बहुत ही कम
सवर्ण समाज की ब्राह्मण,भूमिहार,राजपूत आदि जातियाँ पार्टियों के आधार पर देखा जाय तो कांग्रेस या भाजपा की ही वफादार होती हैं,सपा,बसपा,राजद.....की नहीं।या यों कहें कि सवर्ण समाज पार्टी का नहीं जाति का वफादार होता है।वह राजनीतिक स्वार्थ के लिए सपा,बसपा,राजद में रहता है,पर उसकी निष्ठा भाजपा,कांग्रेस जैसी सवर्ण वर्चस्व वाली पार्टियों के प्रति ही होती है।
एक बार विधानसभा चुनाव-2007 में हमने एक अध्ययन किया।एक ही टीम दिलदारनगर में सपा के ओमप्रकाश सिंह, धानापुर में बसपा के सुशील सिंह,जमानियां में भाजपा के अरुण कुमार सिंह, ग़ाज़ीपुर सदर में कांग्रेस के डॉ. मार्कण्डेय सिंह व जहूराबाद में कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह के लिए प्रचार करते पाए गए।इसी तरह भूमिहारों की एक टीम जो कहने को सपाई थे लेकिन दिलदारनगर में बसपा के पशुपतिनाथ राय,मोहम्मदाबाद में भाजपा की अलका राय,पिंडरा में कांग्रेस के अजय राय,ब्यालसी में बसपा जगदीश राय का प्रचार करते पाए गए।
क्या सवर्ण पिछड़ों-दलितों का हो सकता है हितैषी-
जो सवर्ण विशेषकर ब्राह्मण,राजपूत व भूमिहार कभी भी पिछड़ों-दलितों का हित नहीं सोच सकता।जो सवर्ण हमारे पूर्वजों,बाप-दादा को जमीन पर बैठने नहीं दिया,अपने द्वार से जूता-चप्पल पहने व साइकिल पर चढ़कर गुजरने नहीं दिया,वह हमारे मान सम्मान व अधिकार का हितैषी नहीं हो सकता।ब्राह्मण जब गरीब होता है तो सुदामा और अमीर होने पर परशुराम बन जाता है।
क्या मुसलमान पिछड़ों-दलितों का दुश्मन है?
आदिवासियों-गिरिवासियों-वनवासियों को शिक्षा देने वाले ऋषि शम्बूक की गर्दन ब्राह्मणों ने साज़िश कर राम से कटवा दिया।स्व अभ्यास से धनुर्विद्या में पारंगत निषाद पुत्र एकलव्य का अँगूठा धोखे द्रोणाचार्य ने अर्जुन को महान धनुर्धर बनाने के लिए कटवा लिया।पिछड़ों-दलितों-आदिवासियों को शिक्षा से वंचित ब्राह्मणों ने किया था।मण्डल कमीशन के विरोध में सवर्णों ने 1990 में पूरे देश में तबाही मचा दिया।साइमन कमीशन का विरोध ब्राह्मणों व सवर्णों ने किया,तो हमारे पिछड़े-दलित भाई सवर्णों की बजाय मुसलमानों को दुश्मन क्यों मानते हैं।मुसलमानों ने तो हमे न तो शिक्षा से रोका न आरक्षण का विरोध किया।
भाजपा सामाजिक न्याय व समानता की विरोधी
भाजपा आरएसएस की राजनीतिक सन्तति है।आरएसएस का गठन अंग्रेजी सरकार द्वारा शूद्र वर्ण की जातियों के लिए किए गए आरक्षण के विरोध में ही हुआ।सन् 712 से 1857 तक मुसलमानों-मुगलों का शासन था,तब हिन्दू खतरे में नहीं था।जब अंग्रेजों ने भारतीय समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने का कानून बनाये और शूद्रों को पढ़ने- लिखने का कानून बनाये,तो हिन्दू खतरे में पड़ गया।अंग्रेज तो हम लोगों के लिए भगवान बन के आये।
द्रोणाचार्य व अर्जुन पुरस्कार जातिवाद का प्रमाण-
निषाद पुत्र एकलव्य का अंगूठा ब्राह्मण द्रोणाचार्य ने इसलिए कटवा लिया कि वे अर्जुन से धनुर्विद्या में पारंगत हो गए थे।कैसी विडंबना है कि भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष द्रोणाचार्य व अर्जन पुरस्कार दिया जाता है,जो सवर्णीय जातिवाद का प्रमाण है।पुरस्कार तो वीर एकलव्य के नाम से दिया जाना चाहिए।इस पुरस्कार को अस्सी के दशक में कांग्रेस सरकार ने शुरू किया।यह पिछड़ों,दलितों,आदिवासियों का घोर अपमान है कि जिसने छल-कपट कर एकलव्य का अंगूठा कटवाया और जिसके लिए कटवाया,उनके नाम से पुरस्कार दिया जाता है।यह अन्याय का प्रतीक है।
क्या समाजवादी पार्टी जातिवादियों की पार्टी है?
जो समाजवादी है वह जातिवादी और जातिवादी समाजवादी नहीं हो सकता।जो सबके हित की कल्पना करे,सबके कल्याण व भलाई का काम करे,सबको साथ लेकर चले वह समाजवादी होता है।मुलायम सिंह यादव अपने एक तरफ जनेश्वर मिश्र,कपिलदेव सिंह,रेवतीरमण सिंहमोहन सिंह,बेनी प्रसाद वर्मा को बैठाते थे,तो दूसरी तरफ ब्रजभूषण तिवारी,धनीराम वर्मा,रमाशंकर कौशिक को बैठाते थे।
सपा से मोहन सिंह,ओमप्रकाश सिंह,ब्रजभूषण शरण सिंह,राधेमोहन सिंह,नीरज शेखर आदि राजपूत व रेवतीरमण सिंह भूमिहार,ब्रजभूषण तिवारी सांसद बने।2014 में चुनाव हारने पर सपा ने नीरज शेखर, मोहन सिंह, रेवतीरमण सिंह,ब्रजभूषण तिवारी को राज्यसभा में भेजकर सम्मान दिया।जब मोहन सिंह व ब्रजभूषण तिवारी दिवंगत हो गए,तो मोहन सिंह की बेटी कनकलता सिंह व तिवारी के पुत्र आलोक तिवारी को सपा ने राज्यसभा भेजी।जनेश्वर मिश्र को 4-5 बार,अमर सिंह को तीन व किरणमय नन्दा को दो बार राज्यसभा में भेजा।अरबिन्द कुमार सिंह व रामशंकर कौशिक को राज्यसभा में भेजा,फिर भी सवर्ण सपा को जातिवादियों की पार्टी कहते हैं।
अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल में सवर्णों को प्रतिनिधित्व
माता प्रसाद पांडेय को विधानसभा का अध्यक्ष, डॉ. मनोज कुमार पांडेय,शिवाकांत ओझा, ब्रह्माशंकर त्रिपाठी,राजाराम पांडेय,अभिषेक मिश्रा को कैबिनेट मंत्री, विजय मिश्रा,पवन पांडेय को स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री मंत्री बनाया गया।राजपूत समाज के ओमप्रकाश सिंह, आनन्द सिंह,राजा भैया,अरबिन्द सिंह गोप,राजकिशोर सिंह,राजा अरिदमन सिंह व भूमिहार नारद राय को कैबिनेट मंत्री बनाने के साथ 4-4,5-5 ब्राह्मणों, राजपूतों को स्वतंत्र प्रभार व राज्यमंत्री का पद दिया गया,के बावजूद भी ब्राह्मण,राजपूत कहते थे कि अखिलेश यादव सवर्णों को सम्मान नहीं दे रहे।ऐसा लगता है कि सवर्ण को सम्मान तभी मिलेगा जब उसे सपा मुख्यमंत्री बना दे।
जनेश्वर मिश्रजी व उनके परिवार को सम्मान-अखिलेश यादव जी ने लखनऊ में जनेश्वर मिश्र जी के नाम से एशिया का सबसे बड़ा पार्क बनवाया।उनके भाई तारकेश्वर मिश्रा को कैबिनेट मंत्री व बेटी को राज्यमंत्री का दर्जा दिए।इस सबके बावजूद भी लोकसभा चुनाव में जनेश्वर मिश्रा जी के गाँव के बूथ से सपा प्रत्याशी को मात्र 3 वोट मिला।दूसरे का नहीं तो इनके घर- परिवार का वोट कहाँ गया?
-जाति धर्म से ऊपर उठकर सबके विकास व भलाई के लिए अखिलेश ने किया काम:-
अखिलेश यादव की सरकार ने 18 लाख इंटर पास विद्यार्थियों को लैपटॉप, लाखों लड़कियों को 30 हजार रुपये कन्याविद्या धन,39 लाख बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता,56 लाख महिलाओं को समाजवादी पेंशन दिए तो क्या यह किसी जाति धर्म विशेष को ही इस योजना का लाभ मिला।गम्भीर बीमारियों(हार्ट, किडनी,कैंसर आदि) के इलाज के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था सपा सरकार द्वारा कराई गई।पुलिस सुबिधा उपलब्ध कराने के लिए डायल यूपी-100,महिलाओं के प्रसव हेतु अस्पताल ले जाने व घर ले आने के लिए 102 नम्बर एम्बुलेंस, मरीजों व घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नम्बर एम्बुलेंस की निःशुल्क व्यवस्था किया गया।गाँव के विकास व ग़रीबों को छत देने के लिए जनेश्वर मिश्र ग्राम्य विकास योजना व लोहिया ग्राम विकास व आवास योजना शुरू किया।मुफ्त पढ़ाई-सिचाई-दवाई योजना को युद्ध स्तर पर शुरू किया। 5 लाख की किसान व मछुआरा दुर्घटना बीमा व सहायता योजना का लाभ दिया।फसल नुकसान सहायता योजना शुरू किया।
अखिलेश यादव की सरकार ने सबके विकास व कल्याण के लिए जो काम किया,न किसी सरकार ने किया और न करेगी।
समाजवादी मुलायम ने ही दिया पिछड़ों को आरक्षण का हक
मण्डल कमीशन के तहत पिछड़ी जातियों को समाजवादी मुलायम सिंह यादव ने ही 1994 में 27 प्रतिशत नौकरियों में आरक्षण का हक दिए।शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए पिछड़ों को 27% व अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को 22.5% आरक्षण के साथ ही साथ पंचायती राज अधिनियम-1994 के तहत ग्रामपंचायत, स्थानीय निकाय व नगर निकायों में ओबीसी को 27%,एससी/एसटी को 22.5% व महिलाओं को 33% आरक्षण दिया।मुलायम सिंह यादव की ही देन है कि आज निषाद, लोधी,बिन्द, कश्यप,काछी, कोयरी,कुर्मी,गूजर, बंजारा, बियार,पाल,धनगर,नाई, विश्वकर्मा, प्रजापति,चमार,जाटव,पासी आदि ही नहीं कुंजड़ा,कसाई, फकीर,जुलाहा,अंसारी,गद्दी,घोसी,मनिहार,गिहार,बरई,तेली,कोल,कलवार,मुसहर,बाँसफोर, धरकार, बसोर,गोंड़, खरवार,डोम, खटिक,वाल्मीकि, बहेलिया,पनिका आदि प्रधान,बीडीसी, पार्षद,सभासद,चेयरमैन,प्रमुख,जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर आदि बनने लगे हैं।
मुलायम सिंह ने ही 2006 में निजी मेडिकल, डेंटल,इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेज में ओबीसी को 27% व एससी/एसटी को 22.5% आरक्षण की व्यवस्था दिए।संघीय नीति की पक्षधर योगी सरकार ने इस आरक्षण व्यवस्था को 13 अप्रैल,2017 को खत्म कर दिया।
भाजपा आरएसएस नियंत्रित पार्टी है जो संघ के ही एजेंडे पर चलती है।इससे पिछड़ों,दलितों,अकलियतों, आदिवासियों के हित की बात सोचना ही मूर्खता है।भाजपा से ओबीसी,एससी, एसटी सांसद, विधायक तो बन सकते हैं,पर उनकी औकात खूंटे में बंधी बकरी व बंधुआ मजदूर जैसी ही होती है।ये पालतू तीतर-बटेर व तोता जैसे ही चरित्र के रहते हैं।हिजड़ों में वर्गीय स्वाभिमान होता है,पर मुर्दा ज़मीर के भाजपाई पिछड़ों-दलितों के पास जातीय व वर्गीय स्वाभिमान होता ही नहीं।ये निजस्वार्थ में मुँह पर पट्टी बांध गूंगे-बहरे बने रहते हैं।
अतिपिछड़ों को सम्मान व भागीदारी देकर ही बढ़ा जा सकता है- हाँ, सपा में अतिपिछड़ों को जो स्थानव सम्मान मिलना चाहिए था,नहीं मिल पाया।इसलिए भाजपा ने नफरत की भावना भर कर अपनी तरफ कर लिया।आधार वोट के साथ अतिरिक्त वोटबैंक बढाना है,तो अतिपिछड़ों को सम्मान व भागीदारी देनी ही पड़ेगी।सच मायने में अतिपिछड़े ही सत्ता संग्राम में निर्णायक हैं।

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