Friday, 25 December 2020

निषाद मछुआ किसानों की समस्याओं को लेकर अमेठी सांसद/केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को प्रार्थना पत्र सौंपा

 

सिंहपुर, अमेठी। निषाद मछुआ किसानों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय निषाद संघ के जिला अध्यक्ष की अगुवाई में पदाधिकारियों द्वारा अमेठी सांसद/केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी प्रार्थना सौंपा गया है शुक्रवार को सिंहपुर राम लीला मैदान किसान गोष्ठी कार्यक्रम में नेशनल एसोसिएशन आफ फिशरमैन जिला अध्यक्ष के द्वारा सौंपे गए प्रार्थना पत्र मे लिखाा हैकि  शाशनादेश के क्रम में मत्स्य पालकों व मछुआ किसानों का बैंक द्वारा क्रेडिट कार्ड बनाए जाने का निर्देश हुआ था। परंतु आज तक जनपद में किसी भी मछुआ समुदाय/मत्स्य पालक व मछुआ किसानों का केवल  1% किसान क्रेडिट कार्ड बनाया गया है। मछुआ किसान बैंक जाता है तो बैंक अधिकारी कर्मचारी तीन से चार महीने दौड़ा दौड़ा कर परेशान कर रहे हैं। कमीशन बिना नहीं करते मछुवा किसानों की फाइल, फाईल बैंक से वापस मत्स्य विभाग भेज देते हैं । 
उन्होंने लिखा है कि राजस्व विभाग श्रेणी6 की भूमि जो राजस्व खतौनी में जलमग्न,नदी नाला, झील झाबर दर्ज,कृषि योग्य भूमि पर आसामी पट्टे की भाँति मछुआ समुदाय के व्यक्तियों को प्रत्येक ग्राम पंचायत में कृषि हेतु पट्टे आवंटित किए जाएं। जिन तालाबों में बंधा निर्माण नहीं है पूरे वर्ष पानी नहीं रुकता है या मछली पालने योग्य नहीं है। उन तालाबों को शासनादेश 6 जुलाई 1987 के तहत सिंघाड़ा उत्पादन/कृषि कार्य पर रोक न लगाई जाए। और प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 50 मछुआ आवास का निर्माण करवाने की मांग की, विगत वर्षों से नहीं आया मछुआ आवास अमेठी।इस मौके पर  जिला अध्यक्ष के साथ, दीपक कश्यप, सूरज कश्यप, सहदेव , रामगुलाम कश्यप,विजय,सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। 

Wednesday, 23 December 2020

मण्डल विरोधी भाजपा नहीं हो सकती कभी पिछड़ों की हितैशी -लौटन निषाद

देश में जरूरत है वन नेशन वन एजुकेशन की, निजी शिक्षण संस्थानों में एससी/एसटी का आरक्षण खत्म करना आरएसएस की सोच


लखनऊ।राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव लौटन  निषाद ने कहा कि भाजपा संघ के इशारे पर पिछड़ों दलितों, आदिवासियों को शिक्षा से वंचित करने व सामाजिक अन्याय का शिकार बनाने के काम में जुटी हुयी है। प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के एक महीना के अन्दर ही योगी ने निजी मेडिकल, डेन्टल व इंजीनियरिंग कालेजों में मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा ओबीसी को 27 प्रतिशत व एससी/एसटी को 22.5 प्रतिशत आरक्षण की की गयी व्यवस्था को खत्म कर दिया। यही नहीं मुलायम सिंह यादव जी व अखिलेश यादव जी द्वारा सभी वर्ग व समुदाय के विद्यार्थियों की आगे की शिक्षा के लिए छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था किये थे। योगी सरकार ने पिछड़े दलित वर्ग के विद्यार्थियों की छात्र वृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की व्यवस्था को निष्प्रभावी कर दिया। उन्होंने कहा कि संघ के इशारे पर लोक सेवा आयोग व उच्च न्याय पालिका पिछड़ा-दलित वर्ग का आरक्षण खत्म करने के काम में जुटा हुआ है। भाजपा पिछड़े वर्ग को सामाजिक अन्याय, उत्पीड़न व अत्याचार का शिकार बनाने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ी हुयी है।
       निषाद ने कहा कि मण्डल विरोधी भाजपा कभी पिछड़ों की हितैशी नहीं हो सकती। भाजपा फूट डालों और शासन करो की नीति पर चलते हुए पिछड़ा-अतिपिछड़ा व दलित-अतिदलित के बीच नफरत की भावना पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाया। अखिलेश यादव की सपा सरकार को एक जाति विशेष की सरकार होने का दुष्प्रचार कर अतिपिछड़ों को गुमराह करने व सपा विरोधी बनाने का काम किया। अतिपिछड़ों ने सामाजिक न्याय व संरक्षा की लड़ाई आगे होकर लड़ने वाले यादव समाज को अपना विरोधी मानकर सपा के विरूद्ध हो गया। योगी सरकार की पिछड़ा -दलित विरोधी नीतियों से धर्म की घुट्टी पीकर भाजपा के झॉसे में आने वाले पिछड़े दलित पछता रहे हैं।
      निषाद ने कहा कि आरएसएस का जन्म सामाजिक न्याय के ही विरोध में हुआ। जब ब्रिटिश हुकुमत ने भारत सरकार अधिनियम-1919 के माध्यम से पूरे देश में हिन्दू वर्ण व्यवस्था के अन्तर्गत शूद्र कहीं जाने वाली जातियों को शिक्षा व नौकरियों में प्रतिनिधित्व हेतु डिप्रेस्ड क्लास के नाम पर आरक्षण दिया तो मनुसंविधान समर्थक जातियों ने पहले हिन्दू महासभा और बाद में 1925 में आरएसएस का गठन किया।आरएसएस कांग्रेस की सन्तति है और भाजपा आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी है। भाजपा संघ के रिमोट कन्ट्रोल से संचालित होती है। आरएसएस ने मण्डल कमीशन की रिपोर्ट न लागू करने की शर्त पर 1980 में इन्दिरा गांधी व 1985 में राजीव गांधी को समर्थन दिया। जनता दल की सरकार ने 7 अगस्त,1990 को जब सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था का निर्णय लिया तो भाजपा ने कमण्डल लेकर सोमनाथ से अयोध्या में मंदिर बनाने का मुद्दा उछाल राम रथ यात्रा पर सवार हो गयी।भाजपा पिछड़ों दलितों के साथ यूज एण्ड थ्रो की पॉलिसी अपनाती है। भाजपा में जो ओबीसी,एससी नेता हैं वे अपने जाति व जमात के साथ हर स्तर पर हो रहे सामाजिक अन्याय व अत्याचार पर चुप्पी साधे गंगू बहरे बने बठे हैं और उनका जमीर मर चुका है।उन्होंने वन नेशन वन एजुकेशन की मांग करते हुए कहा कि दोहरी शिक्षा नीति भेदभावपूर्ण है। - Lautan Nishad

Monday, 21 December 2020

भाजपा सरकार पिछड़ों-दलितों को सामाजिक न्याय से वंचित करने में जुटी -लौटन राम निषाद

ओबीसी की जातिगत जनगणना करने व कोलेजियम सिस्टम खत्म करने की मांग

लखनऊ।राष्ट्रीय निषाद संघ(एन ए एफ) के राष्ट्रीय सचिव चौ० लौटन राम निषाद ने केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार पर पिछड़ों-दलितों को सामाजिक न्याय से वंचित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब से केन्द्र व उप्र में भाजपा की सरकार बनी है, पिछड़े -दलित वर्ग के आरक्षण पर कुठाराघात किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने को पिछड़ी जाति का बताते हैं।यदि वे पिछड़ी जाति के हैं तो ओबीसी की जातिगत जनगणना उजागर कर ओबीसी को सभी स्तरों पर जनसंख्यानुपाती आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सवर्ण जातियों को 72 घण्टे के अन्दर संविधान व उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परे जाते हुए जब 10 प्रतिशत आरक्षण दे दिया तो मण्डल कमीशन के तहत 52 प्रतिशत आरक्षण देने का कदम उठाना चाहिये। उ.प्र. सरकार की सामाजिक न्याय समिति-2001 के अनुसार अन्य पिछड़े वर्ग की संख्या 54 प्रतिशत स्वीकार की गयी है तो ओबीसी को 27 प्रतिशत ही आरक्षण क्यों? उन्होंने कहा कि एससी/एसटी की भांति ओबीसी को जनसंख्यानुपाती आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन कराया जाय।
         निषाद ने कहा कि केन्द्र सरकार सेन्सस-2011 के अनुसार एससी, एसटी, धार्मिक अल्पसंख्यक (जैन, बौद्ध, पारसी, मुस्लिम, सिख, इसाई, रेसलर आदि) के साथ-साथ ट्रान्सजेन्डर व दिव्यांग की जनगणना उजागर कर दी गयीं। लेकिन ओबीसी की जनगणना को घोषित नहीं किया गया। उन्होंने कार्यपालिका के साथ-साथ विधायिका, न्याय पालिका, पदोन्नति एवं निजी क्षेत्र के उपक्रमों, संस्थानों व केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी को आरक्षण देने तथा ओबीसी आरक्षण को 9 वीं अनुसूचि में दर्ज करने की मांग किया है। उन्होंने केन्द्र सरकार से सेन्सस -2021 में  जातिगत जनगणना कराने, कोलेजियम सिस्टम खत्म कर उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों का चयन संघ लोक सेवा आयोग व लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा के पैटर्न पर राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग के माध्यम से कराने की मांग किया है।
          निषाद ने कहा कि केन्द्र सरकार सरकारी उपक्रमों, संस्थानों का निजीकरण कर व प्रदेश सरकार संविदा, आउट सोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियाँ कर ओबीसी, एससी, एसटी के आरक्षण को कुंद व निष्प्रभावी कर रही है। उन्होंने कहा कि जूनियर व सीनियर ज्यूडिसियरी में ओबीसी, एससी व एसटी को आरक्षण की व्यवस्था है,परन्तु उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की व्यवस्था न होने से वंचित वर्ग संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं । उन्होंने उच्च न्यायपालिका में कोलेजियम सिस्टम से न्यायाधीशों का मनोंयन न कर संघ लोक सेवा आयोग व लोक सेवा आयोग के पैटर्न पर राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग के द्वारा  त्रिस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से न्यायाधीशों का चयन किये जाने की मांग उठाया है।
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Wednesday, 25 November 2020

विधानसभा चुनाव -2022 में अत्यन्त पिछड़ी जातियां निभाएंगी की भूमिका -लौटन निषाद

भाजपा ने अति पिछड़ी जातियो को सिर्फ वोट बैंक समझ किया अधिकारों से वंचित

लखनऊ, 25 नवम्बर । राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौधरी लौटन निषाद ने भाजपा पर अति पिछड़ी जातियों को अधिकार वंचित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिन्दुत्व के नाम पर भाजपा सिर्फ ईबीसी व एमबीसी की जातियों को वेाट बैंक समझती है। मंडल विरोधी भाजपा कभी पिछड़ों,अति पिछड़ों की  हितैषी नहीं हो सकती । चुनाव के समय पिछड़ों दलितों  व आदिवासियों को हिन्दू कहकर इनकी वोट की बदौलत सत्ता हथियाने के बाद इनके साथ दोयम दर्जे का ही बर्ताव करती है। विधानसभा चुनाव-2022 में 33 प्रतिशत से अधिक संख्या वाली अत्यन्त पिछड़ी जातियां निर्णायक की भूमिका निभायेंगी। किसी भी राजनैतिक दल ने इस वर्ग के साथ सामाजिक-राजनीतिक न्याय नहीं किया। 
        निषाद ने उत्तर प्रदेश के जातिगत समीकरण पर  प्रकाश डालते हुये बताया कि हिन्दू, मुस्लिम सामान्य वर्ग की जातियां- 20-94 प्रतिशत, यादव-10-48 प्रतिशत, निषाद/कश्यप - 10-46 प्रतिशत, जाटव- 11-86 प्रतिशत, कुशवाहा/मौर्य/सैनी-4-85 प्रतिशत, कुर्मी- 4.10 प्रतिशत, लोधी/किसान-3-60 प्रतिशत, पासी-3-87 प्रतिशत, पाल/बघेल-2-38 प्रतिशत, जाट-1-94 प्रतिशत, प्रजापति - 1-84 प्रतिशत, बढ़ई/लोहार- 1.72 प्रतिशत, तेली/साहू-1.61 प्रतिशत, राजभर-1.31 प्रतिशत, चौहान-1.26 प्रतिशत, कोरी- 1.11 प्रतिशत, नाई-1.06 प्रतिशत, कांदुु/भुर्जी -1.01 प्रतिशत, गुर्जर-0.72 प्रतिशत हैं।आगामी विधानसभा चुनाव में अति पिछड़ी,अत्यंत पिछड़ी व अति दलित जातियों की खासी भूमिका रहेगी। प्रजाजाति के रूप में ख्यात लोहार, बढ़ई, कुम्हार, बरई, बारी, नाई, हज्जाम,धोबी आदि  जिन्हें राजनीतिक रूप से महत्व नहीं दिया जाता, कम संख्या होने के बाद भी पंचफोरन वाली प्रजाजातियों की संख्या हर विधानसभा में 40 से 70 हजार तक होती है। जो फ्लोटिंग वोटर के रूप में चुनाव की दिशा-दशा बदल देती हैं। 
        निषाद ने कहा कि अब अति पिछड़ी व अत्यन्त पिछड़ी जातियों के अंदर भी राजनीतिक इच्छाशक्ति, भूख, व सम्मान की भावना जागृत हुई है। इन जातियों की उपेक्षा करने वाला कोई भी राजनैतिक दल सत्ता का हकदार नहीं बन सकता। अब ईबीसी व ,एमबीसी की जातियों में भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा व प्रतिनिधित्व की भावना पैदा हुई है। "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी" को केवल भाषण का रूप ही नहीं मूर्त रूप देना पड़ेगा। इन वर्गों की जो उपेक्षा करेगा, वह खुद राजनीतिक रूप से पीछ़े चला जायेगा। सोशल इंजीनियरिंग व माइक्रो सोशल इंजीनियरिंग के आधार पर संगठन में सम्मान व टिकट वितरण में हिस्सेदारी की आकांक्षा अत्यन्त पिछड़ों में तेजी से बढ़ी है। इस वर्ग की जातियां सत्ता का खेल बनाने व बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। 

Tuesday, 24 November 2020

मत्स्य पालन में अनियमितता को लेकर निषाद संघ के कार्यकर्ता बैठे धरने पर

 गौरीगंज, अमेठी। निषाद मछुआरों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय निषाद संघ के जिला अध्यक्ष की अगुवाई में पदाधिकारियों द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है और करोना महामारी में मछुआरों का लगान माफ किए जाने की सिफारिश की गई है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में नेशनल एसोसिएशन आफ फिशरमैन जिला अध्यक्ष की अगुवाई में दर्जनों लोग धरने पर बैठ गए। धरने के बाद संघ के लोगों ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में लिखा है कि तहसील तिलोई क्षेत्र के विकासखंड सिंहपुर की ग्राम पंचायत खानापुर चपरा निवासी सीताराम पुत्र धौकल ने 7 दिसंबर 2016 को मत्स्य पालन पट्टा शिविर में आवेदन किया था और लगान की दस फीसदी रकम जमा की और पट्टा निरस्त कर दिया गया। तहसील प्रशासन द्वारा उसी तालाब पर पुनः प्रकाशन कर अनुसूचित जाति के पट्टा आवंटित किया जा रहा था। जिसकी शिकायत उप जिलाधिकारी से की गई तो निरस्त कर दिया गया। 2020में मत्स्य पालन के लिए गजट हुआ तो सीताराम ने फिर आवेदन किया जिसे हल्का लेखपाल ने गलत रिपोर्ट लगाकर निरस्त कर दिया गया है। जिला अध्यक्ष ने लिखा कि 27 एवं 28 अक्टूबर  मत्स्य पालन पट्टा शिविर में 44 मछुआ समुदाय एवं 65 अनुसूचित जाति का आवेदन हुआ वह 1 वर्ष की लगान जमा किया गया, जिसमें अभी तक 7 पट्टा स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने लिखा है कि मत्स्य विभाग द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड हेतु लक्ष्य के अनुरूप 181 पत्रावली विभिन्न बैंकों को प्रेषित की गई थी जिसमें 40 पत्रावली विभिन्न बैंकों द्वारा स्वीकृति की गई जबकि 35 पत्रावली को बैंक द्वारा कोई न कोई कमी लगाकर वापस कर दिया गया और लगभग 100 पत्रावली  लंबित है। इस मौके पर  जिला अध्यक्ष के साथ  दयाशंकर, दीपक कश्यप, सूरज कश्यप, विनोद कश्यप, तेज बहादुर कश्यप, जनक बहादुर, सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। 

Monday, 9 November 2020

उ.प्र. विधान परिषद खण्ड स्नातक व शिक्षक क्षेत्र के सपा समर्थित उम्मीदवारों के समर्थन की अपील शिक्षक व स्नातक खण्ड निर्वाचन विधानसभा चुनाव-2022 के लिए स्क्रीन टेस्ट -चौ. लौटन निषाद

लखनऊ । उ.प्र. विधान परिषद खण्ड स्नातक निर्वाचन एवं खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के सपा समर्थित उम्मीदवारों के समर्थन में समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ. लौटन निषाद ने समर्थन की अपील किया है। उन्होंने इसे विधानसभा चुनाव-2022 का स्क्रीन टेस्ट बताया। उन्होंने बताया कि वाराणसी खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लाल बिहारी यादव, गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक क्षेत्र से डा. अवधेश यादव, लखनऊ खण्ड शिक्षक क्षेत्र से उमाशंकर पटेल, वाराणसी खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से आशुतोष सिन्हा, इलाहाबाद -झाँसी, खण्ड स्नातक क्षेत्र से डा0 मानसिंह यादव, एवं लखनऊ खण्ड स्नातक क्षेत्र से रामसिंह राणा समाजवादी पार्टी के समर्थित उम्मीदवार हैं। उन्होंने शिक्षक खण्ड निर्वाचन क्षेत्र व खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र केे मतदाताओं से सपा समर्थित उम्मीदवारांे को प्रथम वरीयता का मत देकर जिताने का आहवान किया है। 
     निषाद ने कहा कि खण्ड स्नातक व खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा समर्थित उम्मीदवारों की सफलता विधानसभा चुनाव-2022 का रोड मैप तैयार करेगा। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से शिक्षक व स्नातक विधान परिषद खण्ड निर्वाचन को गम्भीरता से लेने का आहवान किया है। निषाद ने कहा कि सभी पदाधिकारियांे व कार्यकर्ताओं को खण्ड शिक्षक व स्नातक निर्वाचन को निष्ठा लगन व ईमानदारी से लेेते हुए तन्मयता से जीतने की अपील की है। पार्टी कार्यकर्ता व पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण चुनाव को हल्के में न लंे पूरी गम्भीरता से लें और आज ही से सभी पदाधिकारी व वरिष्ठ नेता खुद को उम्मीदवार मानकर लोगों के बीच जाना  शुरू करेें।
      निषाद ने कहा कि वर्तमान सरकार छात्र-नौजवान, किसान , मजदूर, व्यापारी व श्रमिक वर्ग की विरोधी है। भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों सम्बन्धी बिल को उच्च सदन में रोकने हेतु समाजवादी पार्टी का विधान परिषद में बहुमत जरूरी है। ताकि सरकार की मनमानियों पर अंकुश लगाने की ताकत बनी रहे। 

Thursday, 5 November 2020

फिशरमेन वीजन डाक्यूमेन्ट्स के संकल्प को पूरा न कर भाजपा ने किया वायदा खिलाफी’’उप चुनाव में भाजपा ने प्रशासनिक तौर पर कराया धांधली-निषाद


 लखनऊ 05 नवम्बर, 2020। 5 अक्टूबर, 2013 को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी व स्व0 सुषमा स्वराज ने मावलंकर सभागार में मछुआरा दृष्टि पत्र/फिशर मेन विजन डाक्यूमेन्ट्स जारी करते हुए संकल्प लिया था कि सरकार बनने पर निषाद मछुआरा समाज की जातियों को अनुसूचित जाति/जनजाति का दर्जा देकर क्षेत्रीय असमानता दूर की जायेगी। साथ ही निषाद मछुआरों के आर्थिक विकास के लिए नीली क्रान्ति को विकसित करने का संकल्प लिया था। समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष लौटन राम निषाद ने फिशरमेन विजन डाक्यूमेन्ट्स के संकल्प को पूरा न कर भाजपा पर वायदा खिलाफी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब योगी सांसद थे तो संसद में निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप, बिन्द आदि जातियों की गरीबी व बदहाली का हवाला देकर अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग उठाते थे। परन्तु मुख्यमंत्री बनते ही वे निषादों को भूल गये। भाजपा ने विधान सभा चुनाव 2012 के चुनाव घोषणा पत्र व भाजपा दृष्टि पत्र में संकल्प लिया था कि भविष्य में भाजपा की सरकार बनने पर निषाद, मछुआ, मल्लाह, केवट, मांझी, धीवर,धीमर, कहार, कश्यप, गोड़िया, तुरहा, बाथम, रायकवार, बिन्द, नोनिया, लोनिया, भर, राजभर, कुम्हार, प्रजापति, बियार, बंजारा आदि जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाया जायेगा। 
 निषाद ने कहा कि वर्तमान में राज्य व केन्द्र दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार होने के बाद भी अतिपिछड़ी जातियों से किया गया वायदा भाजपा ने पूरा न कर दगाबाजी व वायदा खिलाफी किया है। सपा सरकार ने 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के संबंध में केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। भाजपा ने अपना वायदा तो पूरा नहीं किया, उलटे सपा सरकार को भेजे गये प्रस्ताव को निरस्त व रद्द कर दिया। चुनाव के समय भाजपा श्रीराम-निषाद राज की मित्रता का हवाला देकर निषाद मछुआरा समाज का वोट लेती रही है। परन्तु सत्ता में आने के बाद निषादों की हर स्तर पर उपेक्षा व अधिकार हनन ही किया है। सपा सरकार में निषाद समाज का सम्मान बढ़ाने के लिए 5 अप्रैल को निषाद राज व कश्यप )षि की जयन्ती के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। जिसे योगी सरकार में खत्म कर दिया। 
 निषाद ने कहा कि भाजपा छल कपट, झूठ फरेब व जुमलेबाजी की राजनीति करती है। पिछड़ा दलित वंचित वर्ग अब भाजपा के चाल चरित्र को समझ गया है। बी0जे0पी0 का नाम भारतीय झूठ फरेब पार्टी या भ्रष्ट जुमलेबाज पार्टी उचित है। योगी ने 7 विधान सभा उप चुनाव में अधिकारियों व प्रशासन की मद्द से चुनाव जीतने का हर सम्भव प्रयास किया है। परन्तु जनता इनकी आशाओं पर पानी फेरेगी। अधिकारियों ने योगी के निर्देश पर यादव व मुस्लिम मतदाताओं का वोटर लिस्ट से हर गांव में 100 से 200 नाम कटवाने का काम किया है। इसके बावजूद भी भाजपा को मुह की खानी पड़ेगी। भाजपा ने अतिपिछड़ों व अति दलितों के साथ नाइंसाफी किया है। अब भाजपा की उलटी गिनती शुरू हो गयी है। भाजपा व आर0एस0 ने यादव-गैर यादव, जाटव-गैर जाटव व हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत की राजनीति करने के बाद अब दहशत की राजनीति शुरू कर दिया है। पूरे प्रदेश में एक जाति विशेष का हर स्तर पर वर्चस्व , अत्याचार व गुण्डागर्दी चल रही है। कानून व्यवस्था ध्वस्त है। पूरे प्रदेश में गुण्डाराज, जंगलराज कायम हो गया है। जनता अब भाजपा के कारनामों से अपने को ठगा महसूस कर रही है। 

 - चौ0 लौटन राम निषाद

मत्स्य पालक कृषक प्रशिक्षण। विदइन डिस्ट्रिक्ट एट के. वी. के

  कठौरा, अमेठी |सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन 'आत्मा' योजना अंतर्गत मत्स्य पालक कृषक प्रशिक्षण। विदइन डिस्ट्रिक्ट एट के. वी. के, ...